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December 18, 2023, 7:00 pm
KHABAR : मन में पवित्र भाव रखे तो सच्ची साधना होती है- पंकज कृष्ण महाराज, श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवाहित, पढ़े खबर 

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नीमच। जब जब धरती पर पाप बढ़ता है तब तब महापुरुष अवतार लेते हैं। हरि अनंत हरि कथा अनंत होती है।यह बात भगवताचार्य पंकज कृष्ण महाराज ने कही। वे अंबेडकर कॉलोनी स्थित नारायण गिरी बाबा मंदिर परिसर  नीमच पर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में  बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मन में सच्ची भावना हो तो सच्ची साधना होती है, 7 दिन तक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा श्रवण करने से राजा परीक्षित को मुक्ति मिल गई थी।युवा वर्ग परमात्मा की भक्ति में समर्पण भाव से लीन हो और मन के भाव पवित्र रखे तो ही सच्ची साधना हो सकती है और सच्ची साधना से ही आत्मा का कल्याण होता है। शुकदेव मुनि ने माता के गर्भ में 12 वर्ष तक तपस्या की थी। परमात्मा के साक्षात दर्शन कर लिए थे। संसार में एकमात्र व्यक्ति थे जिन्हें 7 दिन पहले मृत्यु का आभास हो गया था। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती हैं कि मनुष्य भौतिक संसार में उलझा हुआ है सत्संग के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है।मनुष्य के जन्म के साथ ही मृत्यु निश्चित हो जाती है इसलिए मनुष्य को जीवन पर्यंत परमार्थ के लिए पुण्य कर्म का पुरुषार्थ करना चाहिए।आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं होता है। समस्या का निराकरण के लिए उसके विशेषज्ञों से मिलना चाहिएऔर फिर भी समस्या का निराकरण नहीं हो तो धर्म की शरण में भक्ति तपस्या करना चाहिए ।संसार की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा को एक आसन पर ही बैठकर श्रवण करना चाहिए तभी भागवत ज्ञान गंगा की सिद्धि प्राप्त होती है। भागवत श्रवण करते समय प्रतिदिन भूमि पर ही शयन करना चाहिए। मनुष्य को संसार में रहते हुए पुण्य कर्म करना चाहिए फल की इच्छा नहीं रखना चाहिए। क्योंकि जो व्यक्ति पुण्य कर्म करता है उसे बिना मांगे ही मोती मिल जाते हैं और जो अच्छे कर्म नहीं करता है पाप कर्म करता है उससे मांगने से भी भीख नहीं मिलती है इसलिए हमें सदैव सत्य बोलना चाहिए।
भागवत ज्ञान गंगा श्रवण से मन को शांति तथा संतोष का सुख मिलता है जो संसार में कहीं नहीं मिलता है। सच्चा संत वही होता है जो सिर्फ अन्न का दान ही मांगता है अन्य दान नहीं लेता है।मन में दया भाव नहीं है और दान करते हैं तो वह सार्थक नहीं होता है इसलिए मन में दया भाव भी रखना चाहिए। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी मनुष्य का मार्गदर्शन प्रदान करती है। युवा वर्ग गोकर्ण देव पार्षद संवाद के  चरित्र हमें यह शिक्षा मिलती है कि सिर्फ कथा को सुनने से नहीं कथा को ग्रहण कर जीवन में आत्मसात करने से ही आत्मा कल्याण हो सकता है। मनुष्य जीवन में यदि सफलता प्राप्त करनी है तो प्रतिदिन राम नाम का जाप करना चाहिए।
धुंधकारी प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यदि हम माता पिता की सेवा नही करें उनके लिए 100 बार भी गया श्राद्ध कर दो तो मुक्ति नहीं मिलेगी। सदैव सत्य बोलना चाहिए। द्रोपति ने अपने पांच पुत्रों की हत्या करने वाले अश्वत्थामा को इसलिए क्षमा कर दिया कि अश्वथामा की माता गुरु माता को उनकी मृत्यु का दुख सहन नहीं करना पड़े क्योंकि जो दुख द्रोपति ने अपने पुत्रों की मृत्यु के बाद सहन किया था।भगवान सामने हो तो प्रतिशोध की भावना समाप्त हो जाती है। इसलिए उन्होंने अश्वथामा को क्षमा करने का निर्णय लिया । सत्य कभी नष्ट नहीं होता है। सत्य समान कोई दूसरा धर्म नहीं होता है।गौ माता की रक्षा के लिए चमड़े का त्याग करना चाहिए। प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना चाहिए । गौ माता की जान खतरे में आ सकती है।सत्संग कम समय के लिए मिले वह भी ग्रहण करें एक पल का सत्संग भी जीवन को परिवर्तन कर सकता है एक पल का कुसंग भी जीवन को विनाश करवा सकता है। जुआ खेलते हैं वहां कभी नहीं जाना चाहिए।  हमेशा नुकसान होता है।इसलिए सदैव सत्संग सुनना चाहिए। इस पर हमें विचार करना चाहिए।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में भागवताचार्य द्वारा विदुर, हिर्नाकश्यप, हिर्नाक्ष, प्रहलाद, सनत कुमार, उत्तानपाद, देवहूति,  प्रियव्रत, नरसिंह अवतार, अदिति, दिति, शतरूपा आदि विषयों के महत्व पर वर्तमान परिपेक्ष में प्रकाश डाला।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रतिदिन दोपहर 01 से शाम 04 बजे, 22 दिसंबर तक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही है।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में  भागवत पोथी पूजन के बाद महा आरती की गई। महाआरती में अंबेडकर कॉलोनी मूलचंद मार्ग यादव मंडी आदि क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
वामन अवतार आकर्षण का केंद्र बने-
भागवत कथा के मध्य जब महाराज श्री ने वामन अवतार का प्रसंग बताया तो भक्ति पंडाल में वामन का अभिनय किए हुए  8 वर्षीय नन्हे बालक हिमांशु शिव ने प्रवेश किया और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और वामन अवतार सभी के आकर्षण का केंद्र बने। वामन अवतार की सभी ने पूजा अर्चना कर पुष्प अर्पित किए।
श्रीमद् भागवत में कृष्ण जन्म कल-  
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के मध्य आज मंगलवार को पंकज कृष्ण महाराज श्री कृष्ण जन्म प्रसंग के महत्व पर प्रकाश डालेंगे। इस अवसर पर श्री कृष्ण की झांकी भी सजाई जाएगी। माखन मिश्री का प्रसाद वितरण किया जाएगा।

 

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