चित्तौड़गढ़। अतीत से प्रारंभ करके वर्तमान का पूरा उपयोग करते हुए भविष्य की ओर बढ़ते हुए महान राष्ट्र का निर्माण करने की परिकल्पना को लेकर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई है। जिससे भारत में तकनीकी व बौद्धिक, संस्कारिक ज्ञान के साथ ही विकास के साथ आध्यात्मिकता को जोड़ने का प्रयत्न किया गया है। भारतीय समाज में इसकी स्वीकार्यता कैसे बड़े और जनमानस के भीतर मूल्य की स्थापना कैसे हो इसके लिए विद्या भारती विभिन्न प्रशिक्षण आयोजित कर रही है, साथ ही मीडिया और शिक्षण संस्थान इसके सफल क्रियान्वयन के लिए संवाद के माध्यम से जन जागृति का वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। यह विचार आज यहां विद्या निकेतन में विद्या भारती द्वारा आयोजित मीडिया संवाद में उभर कर आए। विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र प्रचारक प्रमुख नवीन कुमार झा ने बताया कि शिक्षण संस्थानों और मीडिया की जिम्मेदारी है कि किस प्रकार वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षा नीति को सर्वमान्य रूप से क्रियान्वित करने के प्रयास किया जाए। इस पर चिंतन और वैचारिक जन जागरण आवश्यक है। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वतंत्र भारत के लिए वरदान बताते हुए कहा कि भारत में जो धारणाएं विकसित की जा रही है विदेशी ताकतें जिस प्रकार जन मानस में वैचारिक प्रदूषण फैला रहा है, उस भ्रांति को दूर करके शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से न केवल संस्कार बल्कि हमारी ऐतिहासिक धरोहर, आध्यात्मिक धरोहर और तकनीकी विकास के साथ शिक्षा का प्रसार किया जाना है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करना हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य है। हर व्यक्ति के मन में राष्ट्रीयता की भावना, स्वभाव में परिवर्तित हो, भारत के हर एक नागरिक और भावी पीढ़ी में राष्ट्रीयता का विचार और चिंतन किस प्रकार से निर्माण करें, इसके लिए मीडिया और शिक्षण संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा नीति की भारतीय समाज में स्वीकार्यता और जागृति से ही इसका सफल क्रियान्वयन संभव है।
संवाद में शिक्षा विद और मोटिवेशनल स्पीकर दिलीप वेतेकर ने कहा कि नई शिक्षा नीति की आवश्यकता इसलिए पड़ी की जो शिक्षा नीति अंग्रेजों ने लागू की थी उसका उद्देश्य देश को लंबे समय तक गुलाम रखने के लिए भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को विस्मृत करना और अंग्रेजी सभ्यता का अनुसरण करवाना रहा था। पहले यूरोपियन केंद्रित शिक्षा नीति को अब भारतीय संस्कृति के आधार पर संचालित की जाने वाली नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई है। जो हमारी बाहरी और भीतर की दरिद्रता को दूर करने वाली साबित होगी। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक और भावी पीढ़ी के स्वभाव में राष्ट्रीयता की भावना व्याप्त हो, भारतीय संस्कृति, संस्कार आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर के मूल्य और आदर्श का वास्तविक ज्ञान के साथ ही तकनीकी ज्ञान का समावेश हो। इसके लिए जनमानस में वातावरण बनाकर इसकी स्वीकार्यता से ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वन संभव हो सकेगा। इसके लिए शिक्षण संस्थाओं मीडिया और प्रबुद्ध जनों को आगे आकर संवाद स्थापित करते हुए रचनात्मक जन जागरण करना समय की महती आवश्यकता है।
संवाद का संचालन विद्या भारती के अजमेर प्राचार्य और संघ के मीडिया संवाद प्रभारी भूपेंद्र उबावा ने किया।