नीमच। प्रत्येक मनुष्य अपनी आत्म कल्याण करना चाहता है लेकिन वह पाप से बचता नहीं है। पोषध मौन व्रत कर व्यक्ति पाप से बच सकता है। क्यों की पोषध व्रत करने में व्यक्ति साधु की तरह नियम संयम के साथ जीवन व्यतीत करता है। संसार में होने वाले पाप से बच जाता है और इस प्रकार आत्मा पवित्र हो जाती है। यह बात साध्वी अमी दर्शा श्रीजी महारासा की शिष्या अमी पूर्णा श्री जी महाराज साहब ने कहीं। वे श्री जैन श्वेतांबर भीडभांजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट नीमच के तत्वाधान में पुस्तक बाजार स्थित नवीन आराधना भवन में आयोजित धर्म प्रवचन सभा में बोल रही थी।
उन्होंने कहा कि आराधना तपस्या भक्ति चाहे महीने में एक दिन ही करें लेकिन पूरे मनोभाव मन वचन काया से करें तो उसका लाभ मिल सकता है। मार्गशीर्ष ग्यारस पर तपस्या करने का अपना अलग महत्व होता है। हम निरंतर पुण्य कर्म करते रहे तो हमें सभी सुख वैभव संपत्ति मिलती रहेगी। यदि हमने पुण्य कर्म बंद कर दिया तो सुख समृद्धि मिलना भी बंद हो सकती है। धर्म संयम नियमित करना चाहिए यदि धर्म छूटता है तो पुण्य कर्म कम होता है और पाप कर्म का उदय हो सकता है। इसलिए पुण्य कर्म को निरंतर करना चाहिए ताकि पाप कर्म दूर रह सके। जैसे कर्म करेंगे वैसा ही हमें फल मिलेगा। इसलिए सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए। देवगुरु धर्म पुण्य की फैक्ट्री है इसे निरंतर चलाते रहना चाहिए। धर्म के छोटे से छोटे नियम का भी पालन करेंगे तो धर्म की रक्षा होगी और धर्म की रक्षा होगी तो धर्म हमारी रक्षा करेगा।
साध्वी श्री मृदु पुर्णा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि यदि हमारे द्वारा पुण्य कर्म का पुरुषार्थ कमजोर है तो मोक्ष कैसे मिलेगा। इसलिए हमें सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए। आत्मा से पहचान होने पर ज्यादा आनंद मिलता है। भौतिक संपत्ति में व्यक्ति को आनंद ज्यादा मिलता है। इसलिए वह प्रवचन को सुनकर जीवन में आत्मसात नहीं कर पाता है। जिनवाणी के उपदेशों और प्रवचन को सुनकर जीवन में आत्मसात किए बिना उसका लाभ नहीं मिलता है। धर्म सभा का संचालन भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सचिव मनीष कोठारी ने किया।
बच्चों का धार्मिक शिविर आज से प्रारंभ-
साध्वी अमि दर्शा श्री जी महाराज साहब ने आह्वान किया कि जैन भवन में बच्चों का एक दिवसीय धार्मिक संस्कार प्रशिक्षण शिविर आज 24 दिसंबर सुबह 07 बजे से आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण शिविर में बच्चों को प्रभु दर्शन योग प्रतिक्रमण तपस्या व्रत गली निर्माण आदि विभिन्न धार्मिक संस्कारों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।