नीमच। श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा मानव को भगवान से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। श्री कृष्ण के जीवन चरित्र का वांग्मय स्वरूप है यह मुक्ति का मार्ग दिखाती है। जीवन जीने की कला सिखाती है। श्रीमद्भागवत ज्ञान दुख के साथ जीवन जीना सिखाती है। यह बात श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में भागवताचार्य, श्री पंकज कृष्ण महाराज ने कही।वे स्पेंटा पेट्रोल पंप के पीछे इंदिरा नगर स्थित शनि मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हरि भजन के बिना सभी दुःखी रहते हैं, इसलिए सदैव भजन सत्संग से जुड़कर रहना चाहिए। कुछ लोग दुख में रहते हुए भी सुख का अनुभव करते हैं तो उनसे सुख ज्यादा दूर नहीं रहता है मिलकर ही रहता है। मृत्यु जीवन का शाश्वत सत्य है। एकाग्रता पूर्वक भगवत स्मरण करें तभी आत्मा का कल्याण हो सकता है।
भागवत श्रवण से जीवित मनुष्य तो क्या प्रेतात्मा का भी कल्याण हो जाता है और मुक्ति मिलती है। संसार के सभी सुखों से महत्वपूर्ण श्रीमद् भागवत सत्संग होता है। जीवन में कष्टों के बाद ही सच्चा सुख मिलता है भगवान का सेवक बन कर रहना चाहिए। जिसने क्रोध को जीत लिया। संसार के प्रत्येक क्षेत्र में सफल हो सकता है। श्रीमद्भागवत श्रवण करने से अनेक कष्टों का संहार होता है। मन को शांति मिलती है। तनाव दूर होता है। महाराज श्री ने शिव अमर कथा, 24 अवतार का प्रसंग सहित विभिन्न विषयों के महत्व पर वर्तमान परिपेक्ष में प्रकाश डाला।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा से 24 से 30 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही है। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा का शुभारंभ शनि मंदिर में पूजा अर्चना के बाद मंगल कलश यात्रा के साथ हुआ अमृत कलश यात्रा इंदिरा नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए शनि मंदिर पहुंची।