नीमच। श्रीमद् भागवत गीता ग्रंथ भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण धर्म ग्रंथ है। भगवान श्री कृष्ण की वाणी का संदेश हमारे जीवन को नई दिशा देता है। मानव जीवन की सार्थकता की परिभाषा परलक्षित करता है। गीता हमें सदैव पुण्य कर्म के लिए प्रेरित करती है। भगवान श्री कृष्ण हमें धर्म की ओर अग्रसर करने का मार्ग दिखाते हैं। यह बात पंकज कृष्ण महाराज ने कही। वे स्पेंटा पेट्रोल पंप के पीछे शनि मंदिर इंदिरा नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि जीवन में फल की इच्छा रखने वाला व्यक्ति ही है जो मन में असंतोष का भाव लेकर जी रहा है। जो व्यक्ति बिना किसी फल की इच्छा किए कर्म करता है वह निश्चित रूप से जीवन में आनंद के साथ जीवन जीता है। नारद मुनि महान ऋषि थे वे जहां जाते वहां यदि लड़ाई हो रही होती तो लड़ाई रुक जाती है और शांति स्थापित हो जाती है और जहां लड़ाई नहीं होती है तो वहां लड़ाई शुरू हो जाती। वे सदैव नारायण नाम का स्मरण करते रहते थे। नारद मुनि संसार के प्रथम पत्रकार थे उनकी बात कभी रद्द नहीं होती थी। जो मातृशक्ति का आदर करें वह महान संत होता है।जीवन में यदि गुरु मंत्र और प्रभु के दर्शन मिले तो यह किसी को बताना नहीं चाहिए। श्री राम और शंकर भगवान का जीवन चरित्र साधारण सामान्य था। श्री राम जी भी सीधे थे। शंकर भगवान भी भोले थे। प्रेरणा लेकर हमें सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन में आगे बढ़ना चाहिए और पुण्य कर्म करते रहना चाहिए। श्री कृष्ण का नाम भी टेढा है। उनकी बांसुरी भी टेढ़ी थी। उनके पांव भी टेढ़े रहते थे। मथुरा वृंदावन और गोकुल की गलियां भी टेढ़ी है। कृष्ण ने जो कहा वह करना चाहिए। राम ने जो किया वह करना चाहिए तो हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। महाराज श्री ने गुरु दत्तात्रेय, सनत कुमार, नारद, नारायण, कपिल देव, यज्ञ, ऋषभ, कश्यप, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, वेदव्यास, श्री राम, बलराम, कृष्ण, हरि, हंस, बौद्ध, कल्की सहित 24 अवतारों का वर्णन प्रस्तुत किया।
सामूहिक दीप जलाकर दिवाली मनाएं-
श्रीराम का वनवास तो 12 वर्ष में समाप्त हो गया था। लेकिन अयोध्या में राम मंदिर की प्रतिमा 500 वर्षों के संघर्ष के बाद 22 जनवरी को पुनः विराजित हो रही है इस दिन सभी देशवासी अपने-अपने घरों पर दीपक जलाकर नया इतिहास बनाएं और सामूहिक दिवाली मनाकर राम जी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करें।