नीमच। जब किसी पीड़ित को साँस लेने में दिक्कत हो या फिर वो साँस नहीं ले पा रहा हो और वह बेहोश हो जाये तो सीपीआर से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। पानी में डूबने, करंट लगने या दम घुटने की स्थिति में भी पीड़ित को सीपीआर देकर उसकी जान बचाई जा सकती है।
उक्त विचार ज्ञानोदय मल्टी स्पेश्यलिटी हॉस्पिटल में बीएड छात्रों को ट्रेनिंग के दौरान डॉ योगेश अहिरवार ने व्यक्त किये थे। छात्रों को सीपीआर लाइफ सेविंग ट्रेनिंग प्रदान कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा अक्सर दिल का दौरा पड़ने पर यदि व्यक्ति को सीपीआर प्रदान कर दिया जाये तो वह बच सकता है। सीपीआर के कई चरण होते हैं जिसमें सबसे पहले पीड़ित की गर्दन में हाथ लगाकर साँस चलने की जाँच करनी चाहिए। पीड़ित के वायुमार्ग की जाँच करें मदद के लिए कॉल कर बचाव हेतु साँस दे उसके बाद दोनों हाथों से पीड़ित की छाती संपीडित करे। कंप्रेसर के लिए एक से अधिक लोगों की सहायता ले। अपने हाथों को बिना बेंड किये कंप्रेस करे। एक मिनट में 100 से 120 बार पीड़ित की छाती को कंप्रेस करना चाहिए।
इस अवसर पर डायरेक्टर डॉ. माधुरी चौरसिया ने कहा ज्ञानोदय मल्टी स्पेश्यलिटी हॉस्पिटल अपने सभी छात्रों को उक्त ट्रेनिंग प्रदान करेगा ताकि लोगों का जीवन बचाया जा सके।
ट्रेनिंग के दौरान अनेक छात्रों ने सीपीआर का अभ्यास किया एवं अनेक प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासा शांत की।
इस अवसर पर बीएड डिपार्टमेंट के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर दीपा सिंह ने किया एवं आभार डॉ दिनेश तिवारी ने माना।