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December 31, 2023, 3:05 pm
BIG NEWS : मित्रता हो तो श्री कृष्ण और सुदामा जैसी, जिनकी मित्र भक्ति से संसार में हुई मिसाल कायम- भागवताचार्य, श्रीमद्भागवत गीता महापुराण कथा हुआ विश्राम, पढ़े बाल मुकुंद नागर की खबर

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दूदरसी। सात दिवसीय श्री मद्भागवत गीता महापुराण कथा का आज रविवार को विश्राम हो गया। आज की कथा में भागवताचार्य ने बताया कि जामंतक मणी लेने जब श्री कृष्ण जामवंत के पास गए तो उसने मणी देने से इंकार कर दिया और कहा कि मुझसे युद्ध में पराजित कर यह मणी ले सकते हो। दोनों का भयंकर युद्ध हुआ। 27 दिनों तक युद्ध चलता रहा। जब जामंतक को पता चला कि कौन है यह जो मुझसे युद्ध कर रहा है और परास्त नहीं हो रहा है तो उन्होंने अंतर्मन से ध्यान किया तो पता चला कि त्रेतायुग के श्री राम है जो द्वापरयुग में श्री कृष्ण है तो पांव पड़ गया और मणी के साथ अपनी पुत्री जामवंती का भी विवाह किया।
कथा की इसी श्रृंखला में भागवताचार्य ने श्री कृष्ण सुदामा का प्रसंग बहुत ही प्रेरणादायक बताया और दोनों की मित्रता की बहुत सुंदर व्याख्या करते हुए बताया कि सुदामा कृष्ण से मिलने द्वारका गये तो पत्नी सुशीला ने चार मुठी चावल बांध दिए।सुदामा जब द्वारका पहूंचे और द्वारपालों से पता चला कि उनका बालसखा सुदामा आया है तो श्री कृष्ण नंगे पांव दौड़े चले आए और गले मिलकर महल में ले आए। इस अवसर पर भागवताचार्य ने इस प्रसंग पर संगीतमय भजन प्रस्तुत किया जिसकी मधुर धुन पर पूरा पांडाल झूम उठा सभी महिलाओं और पुरुषों ने शानदार नृत्य किया। अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है, इस भजन पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाकर भगवान श्रीकृष्ण में अपनी आस्था का इजहार किया।
राजा परीक्षित को तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु सहज हो ऐसी युति सुखदेव मुनि ने बताई और कहा कि सात दिनों तक प्रयागराज में श्री मद्भागवत गीता महापुराण की कथा अनवरत करें जिसके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। उसी वक्त राजा परीक्षित ने श्री मद्भागवत गीता कथा का सात दिनों तक श्रवण किया। सातवें दिन तक्षक नाग ने आकर परिक्षित को डसा तो उसके भयंकर विष का उनके उपर कोई असर नहीं हुआ। किन्तु श्रापवश भगवान ने उनकी मृत्यु को सामान्य करते हुए अपने श्री चरणों में स्थान दिया। 
इस प्रकार सात दिवसीय श्री मद्भागवत गीता जो कन्हैयालाल दमामी द्वारा अपने स्वर्गीय माता-पिता की पुण्यस्मृती में कथा का आयोजन किया गया था। आज उसका विश्राम हो गया। कथा के अंत में महाआरती की गई और भागवत भगवान श्रीकृष्ण के मिष्ठान का भोग लगाया गया और सभी श्रोताओं को प्रसाद वितरित की गई।
आज सबसे बड़ा पुण्य का कार्य किया और श्री मद्भागवत ज्ञान गंगा में डुबकी लगाने का कार्य धनगर समाज के कंवरलाल घीसालाल पूर्व सरपंच देवी लाल धनगर ने भंडारा आयोजित किया जिसमें सभी ग्राम वासियों को नुक्ती पुड़ी का सहभोज कराया।

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