गरोठ। तहसील के ग्राम कोटडाबुजुर्ग व आसपास के क्षेत्र में किसान संतरे को लेकर चिंतित हैं। किसानो को संतरे के दाम नही मिलने से नाराज किसानो ने संतरे तोडकर रोड पर फेंक दिए हैं।
संतरे की फसल का उठाव नही होने के कारण किसानो को नुकसान हो रहा हैं। वहीं व्यापारी संतरे खरीदने को भी तैयार नही हैं। कुछ दिन पहले जो संतरे की फसल तीस रुपये किलो बिकना थी वो मौसम की मार से दस रुपये किलो में भी व्यापारी लेने को तैयार नही हैं।
वहीं क्षेत्र के किसानो को कई प्रकार कि परेशानियां का सामना करना पड़ रहा हैं। खासकर तो मौसम की मार झेलना पड रही हैं। कोटडाबुजुर्ग व बोलिया क्षेत्र में दिसंबर माह में पेड़ों से संतरा तोडकर मार्केट में जाता हैं। पर इस साल मौसम व बारिश के कारण फसल का उठाव नही हो रहा हैं।
इस साल अभी तक संतरा पेड़ों पर ही लटक रहा हैं। संतरे की फसल पुरी तरह पेड़ों पर ही पीली पड़ गई हैं। इस साल व्यापारी भी कम ही आये हैं। महाराष्ट्र के एक या दो ही व्यापारी हैं जिससे माल की खपत भी नही हो रही हैं।
किसानो के संतरे की खरीदी नही होने के कारण किसान अब संतरे की फसल पर ध्यान भी नही दे रहा हैं। संतरे पेड़ों पर पिले पड रहे हैं और पेड़ों से नीचे गिर रहे हैं। जो संतरा अभी तक नवंबर से 15 दिसंबर तक तुडाई होना थी वो अभी तक पेड़ों पर ही लटक रहा हैं।
किसान बाबुलाल पाटीदार, धन्नालाल खैर, महेश प्रजापति, मनोज पाटीदार सहित कई किसानो ने बताया कि जो संतरा तीस रु किलो बिकना था आज वही संतरा दस रु किलो में भी व्यापारी लेने को तैयार नही हैं। इस बार व्यापारी भी कम ही पहुंचे हैं। लोकल मंडी भवानीमंडी में संतरा पांच से आठ रुपये किलो बिक रहा हैं। वहीं बांग्लादेश संतरा नही पहुंच रहा हैं। इससे संतरे के भाव टुटे हैं। कई टन संतरा बगीचे में ही बेकार हो रहा हैं। किसान मायुस है और केंद्र सरकार पर आस बांधे बेठा हैं।