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January 10, 2024, 11:09 am
NEWS : प्रतिफल की उम्मीद किये बगैर की गई दया व बरती करूणा, जीवन को शांति व सकून प्रदान करती है- मुनि श्री सुमित जी, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। आचार्य श्री रामेश के प्रबुद्ध शिष्य श्री सुमित मुनि जी मसा ने हरिपुरम जावद में आचार्य श्री के नेश्राय में हुऐ प्रवचन में कहा कि जैन सूत्र- यह मार्गदर्शन करते है कि आत्म कल्याण की अपेक्षा रखने वाले व्यक्ति को लज्जा, दया, संयम व ब्रहमर्च का पालन करना चाहिये। सज्जनता के दो प्रमुख लक्षण रहे है- एक दया व दुसरा परोपकार। आत्मिक सार्थकता के लक्ष्य वाले प्रत्येक जीव केा इस जीवन में इन मुल्यो की ससंस्कार स्थापना करना चाहिए। मुनि श्री ने फरमाया दया का अर्थ है जीवन में अन्य के दुःख केा पीडा को संजीदगी से अनुभव करना। दुसरो की पीडा दुःख को हम सहानुभूति, सदभाव से स्नेह -समभाव प्रकट कर कम कर सकते है। जिनके जीवन में सम्यकत्व का भाव है वे हमेशा दुःखी पीड़ित जीवो के प्रति उनके कष्टो को निवारित रहने का भाव रखते हैं। सम्यकत्व जीव हमेशा यह कामना करता है कि सभी जीव सुखी रहे। दुःखो पीडाओ से मुक्त रहे।
मुनि श्री सुमित ने फरमाया हमारा विचार व्यवहार हमेशा इस भाव से जुडा रहे कि मैं कैसे सभी जीवो को दुःख से राहत देने का उपक्रम कर संकू। जब भी संकट में किसी जीव को देखो उसकी मदद का कारण निमित बनने का प्रयास करे।
बीकानेर में प्रवास के दौरान वीरेन्द्र मुनि जी मसा ने एक विकलांग से संवाद में कहा कि विकलांग के चलने में बहुत तकलीफ उठाना पडती है। कष्ट का सामना करना पडता है। विकलांग व्यक्ति ने कहा मेरा गम दुनिया मे जितने दुःख है कष्ट है उनसे कही कम है। यह मुझे निराश नही करता। यह सोच दया करूणा से श्रा हुआ है। मुनि श्री सुमित जी ने फरमाया दया परोपकार से कुछ प्रतिफल मिलेगा इस उम्मीद में न करे ऐसा करने से आत्मिक शांति मिलती है। आध्यात्मिक साधना से रत सभी दयाव्रत को जीवन का संस्कार बनाये। इसे व्यवहारिक रूप से पालन करें मुक्ति की पुण्यवानी बंधेगी। जीवन शांत व आंनद से भरा रहेगा। 
इससे पूर्व श्री मयंक मुनि जी मसा ने फरमाया जिन शासन में हम है इस स्वरूप का बोधकर अपने जीवन को नियमित करने की आवश्यकता है। भौतिक सुविधाओ से संपन्नता हमें प्रेरित व संतुष्ट करती है। किंतु संसार से आसक्ति संसार बढाती है। संसार में निवृति मुक्ति का बंध बाधती है। पूज्य गुरूदेव का सानिध्य तभी सफल होगा जब सांसारिक आसक्ति को हम कम कर निवृति की ओर जीवन को बढा सके। अखिल भारतिय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी ने प्रवचन सभा के समापन मे कहा- पूज्य गुरूदेव की जावद में उपस्थिती श्रावक श्राविकाओ के आत्म कल्याण का श्रेष्ठ अवसर है इसका लाभ ले। पूज्य गुरूदेव श्री रामेश ने मांगलिक श्रवण करवाई।

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