नीमच। गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार रामचरितमानस में 84 प्रसंग है। जो इन 84 प्रसंग को श्रवण करता है उसको 84 लाख योनि के जन्म मरण से मुक्ति मिलती है। उसके जीवन में कभी दुख नहीं आता है। श्री राम कथा गंगाजल की तरह पवित्र है। श्री रामजी की कथा लोक जन कल्याणकारी कथा है। तन मन धन धर्म के साथ रहना चाहिए तभी जीवन सफल होता है। यह बात जगद्गुरु स्वामी धीरेन्द्राचार्य ने कही। वे श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर परिसर स्थित भक्ति पांडाल में आयोजित श्री रामकथा में बोल रहे थे।
स्वामी धीरेन्द्राचार्य ने कहा कि जहां श्री राम जन्म की कथा हो वह स्थान अयोध्या बन जाता है। माता पार्वती ने श्री राम की जन्म कथा को श्रवण किया तो कथा पवित्र गंगा बन गई थी। जब कलयुग में गंगा नहीं रहेगी तब राम कथा श्रवण कर लोग अपने पाप को धोएंगे। राजा दशरथ ने पत्नी के साथ तपस्या की तो श्री राम का जन्म हुआ था। पत्नी का दंपति धर्म यदि जीवन में साथ रहता है तो मनुष्य के मन में श्री राम का जन्म होता है। राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या को जब पति और पुत्र में से एक को चयन करने की बात आई तो उन्होंने दुखी पति के साथ रहना स्वीकार किया। श्री राम को वनवास के लिए त्याग किया था। नारी को सदैव पति के दुख में साथ देना चाहिए। जीवन में यदि आहार शुद्ध हो तो हमारा व्यवहार भी संसार में अच्छा होगा। तंबाकू गुटखा का सेवन कर भजन कभी नहीं करना चाहिए। यह पाप का भागी बना सकता है। यदि पति अकेले कोई कर्म करता है तो वहां राक्षस का जन्म होता है।
यदि पत्नी का आचरण पति के अनुकूल हो तो जीवन में परमात्मा के चरण आते हैं। व्यक्ति के जीवन में जब भक्ति की चेतना जाग्रत तभी नया सवेरा हो सकता है इसलिए सदैव भजन कीर्तन करते रहना चाहिए और आत्मा को पवित्र करते रहना चाहिए। जिसका भाव पवित्र होता है उसे ही भगवान के दर्शन होते हैं। नारी की इज्जत अनमोल है उसकी सुरक्षा करना है प्रत्येक प्राणी का कर्तव्य है। छत्रपति शिवाजी और महाराणा प्रताप का जन्म देने वाली नारी शक्ति महान है। पुरुष नमक का बोरा है वह बाहर भी रहेगा तो सुरक्षित रहेगा। पति पत्नी का संकल्प एक होना चाहिए तभी भगवान इच्छा पूरी करते हैं। राजा दशरथ ने श्रृंगी ऋषि के द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था।
महाराज श्री ने श्री राम जी जन्म के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब धरती पर अपराध बढ़ते हैं। तब धरती पर महापुरुष अवतार लेते हैं। श्रीराम कथा जगत को पावन करने वाली ज्ञान गंगा है। अहंकार काम क्रोध मोह टूटने से जीवन में सफलता मिलती है यदि हम सुख में राम का स्मरण करे तो दुख कभी नहीं आता है। धर्म के मार्ग पर चलने वाले का सदैव कल्याण होता है। मनुष्य जीवन में यदि सफलता प्राप्त करनी है तो निंदा का अपराध करने से बचना चाहिए। श्री राम इच्छा को स्वीकार करना मनुष्य का कर्तव्य है। दुख से बड़ी राम नाम की माला है। राम का स्मरण करेंगे तो दुख आता ही नहीं है। तन मन धन धर्म के साथ रहना चाहिए तभी जीवन सफल होता है।
श्री राम कथा में महाराज श्री ने मनु शतरूपा प्रसंग, श्रृंगी ऋषि, ब्रह्मा जी, गुरु वशिष्ठ, आदि धार्मिक विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा में बड़ी संख्या में क्षैत्रवासी उपस्थित थे। महाआरती के बाद महाप्रसादी का वितरण किया गया।
श्रीराम जन्म श्रवण कर भाव विहल हुए श्रद्धालु-
महाराज श्री ने कथा के मध्य जब श्रीराम जन्म का प्रसंग बताया तो भक्ति पंडाल जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। कौशल्या के जायो ललना जन्मे अवध में राम अवध में बाजे बजाईया... श्री राम जय राम जय जय राम भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। श्री राम जन्म प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विहल हो गए।
निःशुल्क सेवा दी दर्द निवारण मानव सेवा शिविर-
श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर परिवार द्वारा आयोजित श्री राम कथा के मध्य पंचमुखी बालाजी मंदिर पर प्रतिदिन दोपहर 12 से 4 बजे तक समीप मानव सेवार्थ सिद्धी विनायक थेरेपी सेंटर की टीम द्वारा थेरेपी प्रशिक्षक प्रदीप राव मराठा के नेतृत्व में टीम द्वारा कथा में उपस्थित भाग लेने वाले श्रद्धालु भक्तों को घुटने, कमर, साइटिका स्लिप डिस्क, जोड़ों का दर्द व पेट संबंधी आदि रोगों का निवारण के लिए निःशुल्क दर्द निवारण थेरेपी प्रदान की गई।