नीमच। श्री रामकथा सत्य की स्थापना करती है और सत्य सनातन धर्म सत्य है। हमारे सारे पवित्र ग्रंथ सत्य है। सत्य केसे बोला जाता है यह श्री राम कथा बता रही है। आप किसी की भी निंदा बुराई करना छोड़ देंगे तो सत्य के पास होंगे।
यह बात अनंत श्री विभूषित हनुमंत द्वारा चित्रकूट धाम पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी श्री धीरेंद्राचार्य जी महाराज ने कही। वे श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर परिवार एवं समस्त भक्तगण कानाखेड़ा के तत्वावधान में श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर स्थापना दिवस एवं मकर संक्रांति के पावन पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित श्री राम कथा एवं अखंड रामायण पाठ के मध्य आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि जीवन में भजन कीर्तन देव दर्शन के लिए समय निकालना जरूरी है। सदैव सत्य बोले सत्य का आदर करना चाहिए। सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए सुख दुख से ऊपर आनंद है और आनंद है तो परमात्मा है और श्री राम कथा से आनंद व परमात्मा की प्राप्ति होती है। आज सत्य को जानकर हम अनजान बन रहे हैं राम से दुनिया को सत्य सीखना चाहिए। राम कथा भी हमें आत्मबोध करवाती है और काम क्रोध से मुक्त करती है। हम सांसारिक भौतिकवाद में हम भगवान को भूल जाते हैं। जीवन में सदैव भगवान को स्मरण रखने से आनंद की प्राप्ति होती है। संत महात्मा व्यक्ति विशेष के नहीं पूरे जगत के कल्याण के लिए सेवा कर्म करते हैं। हमें अपनी संतान का नाम महान चरित्र महापुरुषों राम कृष्ण के नाम पर रखना चाहिए। अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा जीवन पर्यंत पाप कर्म करने के बावजूद भी मृत्यु से पूर्व अंतिम समय नारायण नारायण नाम स्मरण करने से उसके जीवन का कल्याण हो गया था। धार्मिक कथा यज्ञ में बाधक नहीं बनना चाहिए। महात्मा की सेवा में समर्पित किया क्षण और कण कभी निष्फल नहीं जाता है। संतान को संतों की सेवा और सुसंस्कारों से जोड़कर रखना चाहिए तो उसके जीवन में सफलता सदैव रहेगी। महात्मा सनातन धर्म संस्कृति के प्रमुख आधार स्तंभ है। जिस व्यक्ति के कदम भगवान की ओर बढ़ते हैं उसे सिंहासन अपने आप मिलता है। जिस घर में कन्या भोज, ब्राह्मण भोज महात्मा भोज होता है। वह घर सौभाग्यशाली होता है। संत की दाढ़ी गंभीरता का प्रतीक होती है।
महाराज श्री ने राजा हरिश्चंद्र, गिद्धराज जटायू, राम-सीता विवाह, तारकासुर वध, धार्मिक प्रसंग का वर्तमान परिपेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया। राम कथा में कानाखेड़ा, गिरदोडा, रेवली देवली, विसलवास, रातडिया, दूलाखेड़ा, रावतखेड़ा, पिपलोन ग्रामीण क्षेत्र से श्रद्धालु सहभागी बन रहे हैं। महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।