सरसी। जावरा क्षेत्र के आस पास गांव में जगह-जगह उजमनी कर इंद्रदेव को मनाने की कोशिश की जा रही है। ताकी अन्न दाता किसानो की सोयाबीन सहित अन्य फसलों को नया जिवन दान मिल सकें उसी को लेकर कल शनिवार को जावरा समीप गांव सरसी मैं भी उजमनी मनाई जाएगी सभी वर्ग द्वारा अपने खेतों एवं जंगल में दाल, बाटी, चूरमा बनाकर इंद्रदेव को भोग लगाकर अच्छी बारिश की कामना की जाएगी.. वही इस दिन गांव के पंच-पटेल और ग्रामीण जन ढोल-धमाकों के साथ सभी देवी देवताओं को नौतने जाते हैं इस दौरान सभी देवी-देवताओं के सिंदुर लगाकर व धूप ध्यान भी किया जाता है इस दौरान मंदिर में पूजा अर्चना की जाएगी तथा पूरे गांव में कार्य बंद रखा जाएगा।
आपको बता दे कि अच्छी बारिश के लिए मालवा क्षेत्र में खेड़ा देवत पूजन की परंपरा निभाई जाती है. इसके तहत खेड़ा देवत का पूजन कर गांव के बाहर दाल बाटी चूरमा बनाया जाता है खेड़ा देवत पूजन अच्छी बारिश की कामना को लेकर इंद्रदेव को रिझाने के लिए इस परंपरा का निर्वहन आज भी कई गाँवो में किया जाता है यह परंपरा काफी समय से चली आ रही है ग्रामीण इलाकों में मानसून से पहले या बुवाई के बाद खेड़ा देवता पूजन का रिवाज है खेड़ा देवता पूजन के दिन लोग घरों से बाहर खाना बनाते हैं भगवान इंद्र देव के साथ सभी देवी- देवताओं को चूरमे का भोग लगाकर परिवार के सारे लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं. इसके पीछे एक मात्र मान्यता यह है कि खेड़ा देव पूजन से अच्छी बारिश होती है।
कई परिवार सामूहिक तौर पर गांव के बाहर किसी प्रमुख स्थान पर एक साथ खाना बनाकर अपने-अपने देवी-देवताओं को भोग लगाकर इस अनूठी परंपरा का निर्वहन करते हैं. हालांकि अब यह परंपरा गांव तक ही सीमित रह गई है. शहरों से यह परंपरा धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है. इसके चलते शहरों में रहने वाले गांव के लोग इस दिन अपने पैतृक गांव पहुंचकर खेड़ा देवत की पूजा में शामिल होते हैं. इस दिन गांव के बाहर सार्वजनिक स्थान या फिर अपने खेतों पर चूरमा, दाल और बाटी बना कर देवी-देवताओं को भोग लगाने का रिवाज है।