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November 8, 2024, 1:23 pm
NEWS : भगवान श्रीसांवलिया सेठ की प्रतिमूर्ति ले जाने पर रोक, अलग-अलग कार्यक्रम में पांवणा बनाकर ले जाते थे पुजारी, सभी को किया पाबंद, पढे़ खबर 

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चित्तौड़गढ़। भगवान श्री सांवलिया जी की प्रतिमूर्ति को किसी भी कार्यक्रम में ले जाने पर रोक लगा दी गई है। काफी समय से श्री सांवलिया जी मंदिर के कुछ पुजारियों द्वारा सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक कार्यक्रमों में सांवरा सेठ की प्रतिमूर्ति ले जाया जा रहा था। बदले में रुपयों की मांग की जा रही थी।


कुछ भक्तों ने जब मंदिर में आकर इसकी जानकारी दी तो मंदिर मंडल के सदस्यों के होश उड़ गए। खुलासा होते ही इस संबंध में मीटिंग की गई और पुजारियों को पाबंद कर दिया गया।


घर पर ले जाने पर रुपए लेते थे पुजारी
एडीएम (प्रशासन) और श्री सांवलिया जी मंदिर मंडल की सीईओ प्रभा गौतम ने एक आदेश जारी करते हुए सांवरा सेठ की प्रतिमूर्ति को अन्य प्रोग्राम में ले जाने पर रोक लगा दी हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर पुजारियों की प्रतिमूर्ति का साथ फोटो शेयर हुई। उदयपुर से आया एक भक्त श्री सांवलिया सेठ के दरबार पहुंचा और खुद के घर सांवरा सेठ के आने की बात कही। जब मंदिर मंडल के सदस्यों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इस संबंध में पूछताछ की।


भक्त ने बताया कि उनके घर के प्रोग्राम में ठाकुर जी पांवणा बनकर आए थे। इसके लिए उन्होंने पुजारी को रुपए भी दिए थे। उसके बाद ऐसा एक नहीं बल्कि कई मामले सामने आते गए। अधिकतर भक्त उदयपुर जिले के रहने वाले थे। इस बात का खुलासा होते ही मंदिर मंडल के सदस्यों के होश उड़ गए। पहले शालिग्राम जी को तुलसी विवाह के दौरान पांवणा बनाकर ले जाया जाता था, लेकिन कई सालों पहले इस पर भी रोक लगा दी गई थी।


अन्य जानकारी आने पर होगी कार्रवाई
अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रभा गौतम ने बताया कि पुजारियों द्वारा यात्रियों से सहज व्यवहार रखने के साथ ही अलग-अलग निजी सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक प्रोग्राम्स में भगवान श्री सांवलिया सेठ की प्रतिमूर्ति को ले जाने पर रोक लगा दी गई है। इससे मंदिर मंडल का कोई संबंध नहीं है। पुजारियों को ऐसा ना करने पर पाबंद किया गया है। साथ ही, आगे से ऐसी जानकारी आने पर उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की हिदायत भी दी गई है।


भक्तों से सीधे पोशाक नहीं ले पाएंगे पुजारी
उन्होंने बताया कि मंदिर मंडल की ओर से पोशाक रोज दी जाती है। लेकिन पुजारी अब खुद भक्तों से डायरेक्ट पोशाक लेकर ठाकुर जी का श्रृंगार चेंज कर देते है। ऐसे में पुजारियों को भगवान श्री सांवलिया सेठ की छवि में किसी भी तरह का अलग श्रृंगार कर परिवर्तन नहीं करने की हिदायत दी गई। भगवान की पोशाक मंदिर मण्डल के सदस्य हर रोज उपलब्ध करवाएंगे। मंदिर पुजारी खुद किसी भी यात्री से अपने स्तर पर पोशाक लेकर ठाकुर जी धारण नहीं करवा सकते। सांवलियाजी मंदिर बोर्ड की बैठक में मंदिर मंडल के अध्यक्ष भैरूलाल गुर्जर, सदस्य श्री लाल पाटीदार, ममतेश शर्मा, अशोक शर्मा, शंभू सुथार, संजय मंडोवरा, प्रमुख पुजारी द्वारका दास, अन्य पुजारी, शिवशंकर पारीक प्रशासनिक अधिकारी-प्रथम, नंदकिशोर टेलर प्रशासनिक अधिकारी-द्वितीय सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।

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