चित्तौड़गढ़। पंडित सूरजचन्द्र सत्यप्रेमी डांगी जी के पुत्र गिरधारी प्रकाश डांगी द्वारा अपने पिता द्वारा लिखी गई कई रचनाओं को समाहित कर तैयार की गई प्रेमानुरागेश पुस्तक का संत द्वय रमताराम जी एवं दिग्विजयराम जी ने विमोचन करते हुए कहा कि इस पुस्तक में जैन धर्मावलंबि पंडित सूरजचन्द्र ने राम भक्ति को सर्वाेपरि मानते हुए रामानुरागी के रूप में रामचरित्र मानस के सात सौपानों को अपने ही अंदाज में प्रस्तुत किया। चार दशक पूर्व निधन के बावजूद उनके पुत्र गिरधारी प्रकाश डांगी ने अपने पिता की एक डायरी को आधार मानकर उसे पुस्तक स्वरूप में तैयार किया, जिसका संपादन जगदीप डांगी हर्षदर्शी, प्रकाशन जिनेन्द्र डांगी एवं सहयोगी रामप्रसाद मून्दड़ा ने स्तुत्य प्रयास कर संतों और विद्वानों के लिए एक प्रेरणास्पद शब्द पुंज प्रस्तुत किया हैं, जिसके प्रथम खंड में राम चरित्र मानस, द्वितीय खंड में स्वयं की रचनाएं, दर्शन की व्याख्या व स्वरचित पदों के साथ ही तृतीय खंड में मंगलस्तव देशकाल परिस्थितियों एवं ईश्वर को पद्य रूप में समर्पित किया हैं। ईश्वर आराधना, चिंतन, मनन की यह शब्द भेंट डांगी परिवार की अनुकरणीय कृति संतों और विद्वानों के लिए ज्ञानार्जन करेगी।