खंडवा। बोर्ड परीक्षा से पूर्व स्कूलों में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति को लेकर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने नाराजगी जताई है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि कक्षा 10वीं व 12वीं के ऐसे विद्यार्थी जो स्कूल से लगातार अनुपस्थित हैं, उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करें। प्राचार्य गांवों में कोटवार के माध्यम से मुनादी कराकर विद्यार्थियों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें।
साथ ही लगातार अनुपस्थित विद्यार्थियों के पालकों को पत्र लिखें। जिससे वह स्कूल आकर पढ़ाई कर परीक्षा में उत्तीर्ण हो सकें। उनके बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम सुधर सकें। इसके बाद भी यदि बच्चें स्कूल नहीं आते है तो उनके पेरेंट्स को एसडीएम के माध्यम से नोटिस भेजे जाए। इधर, कलेक्टर के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने कम उपस्थिति वाले बच्चों का रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया है। प्राचार्यों को मुनादी के संबंध में निर्देश दिए है।
लोकल परीक्षाओं के शेड्यूल ने बिगाड़ी व्यवस्था
हर साल मार्च-अप्रैल में होने वाली 9वीं व 11वीं की वार्षिक परीक्षा इस साल बोर्ड की 10वीं व 12वीं की परीक्षा से पहले ही ली जा रही है। समय से पहले लोकल परीक्षाओं का असर बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर पड़ रहा है। जिला शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षाओं के बेहतर परिणाम के लिए जिलास्तर पर कुछ नवाचार किए थे। लेकिन लोकल परीक्षाओं के शेड्यूल ने विभाग की सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया।
अतिरिक्त क्लास में 25 प्रतिशत से भी कम बच्चों की उपस्थिति
जिला शिक्षा अधिकारी पीएस सोलंकी के मुताबिक, बोर्ड परीक्षा से पहले 9वीं-11वीं की लोकल परीक्षाएं होने का असर 10वीं व 12वीं की परीक्षा की तैयारियों पर पड़ रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी लोकल परीक्षा लेने में लगा देने से 10वीं-12वीं के विद्यार्थियों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया है। ऐसे में रेमेडियल क्लास सहित विशेष तौर पर ली जा रही कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या 25ः भी नहीं रह गई है।