ओंकारेश्वर। सावन माह की पावन हरियाली अमावस्या पर तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने नर्मदा नदी के घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई और फिर बाबा ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए मंदिर की ओर प्रस्थान किया। घाटों से मंदिरों तक श्रद्धा की कतारें दिखाई दीं। भक्तजन “हर हर महादेव” और “नर्मदे हर” के जयघोषों के साथ भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आए। महिलाओं, युवाओं और वृद्ध श्रद्धालुओं ने परंपरागत परिधानों में पूरी आस्था और विश्वास के साथ भगवान का रुद्राभिषेक एवं जलाभिषेक कराया।
हरियाली अमावस्या का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, सावन माह की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से शिव आराधना, वनों की रक्षा और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित है। इस दिन नर्मदा तट पर स्नान और शिवलिंग पर जल अर्पण करना सौभाग्यदायक माना जाता है।
श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
देश के विभिन्न राज्यों- मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और उत्तर भारत से हजारों श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचे। स्थानीय प्रशासन ने व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और मंदिर प्रबंधन समिति ने भक्तों के लिए जल, प्रसाद एवं शीतल जल की समुचित व्यवस्था की।
अभिषेक का महत्व
सावन माह में भगवान शिव को जल, दूध, शहद, बेलपत्र और गंगाजल से अभिषेक करना विशेष पुण्य फलदायक माना गया है। मंदिर के पुजारियों ने भक्तों का विधिपूर्वक अभिषेक संपन्न कराया। श्रद्धालु परिवारों सहित शिवलिंग पर बैठकर सामूहिक रुद्राभिषेक करते देखे गए।
सावन में शिव की आराधना का सर्वाेच्च पर्व
हरियाली अमावस्या शिवभक्तों के लिए आत्मिक शांति और आस्था का पर्व है। ओंकारेश्वर जैसे ज्योतिर्लिंग तीर्थ पर यह दिन श्रद्धा का महापर्व बन जाता है, जहां प्रकृति, भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है।