गरोठ। कोटड़ा बुजुर्ग और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में नीलगायों और सुअरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। दर्जनों की संख्या में नीलगायें रोजाना खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। शाम होते ही नीलगायों के बड़े झुंड खेतों को अपना अड्डा बना लेते हैं, जिससे किसान रातभर जागकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
किसानों के अनुसार नीलगायें 25 से 30 के झुंड में खेतों में प्रवेश कर गेहूं, सरसों, टमाटर और प्याज जैसी फसलों को रौंदकर बर्बाद कर रही हैं। यह समस्या रात के साथ-साथ दिन में भी बनी रहती है, जिससे फसल बचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
किसानों ने खेतों की सुरक्षा के लिए कई प्रयास किए, लेकिन नीलगायों और सुअरों को रोकने के सभी उपाय विफल साबित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक ओर फसलों के उचित दाम नहीं मिलने से परेशानियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर जंगली जानवरों से फसलें बचाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कई गांव प्रभावित-
कोटड़ा बुजुर्ग, बोलिया, पावटी, कोटड़ा खुर्द, कालाखेड़ा, चिकनिया, रावटी, सेमली, बरखेड़ा अंबे का, नलखेड़ा सहित कई गांवों के किसान इस समस्या से अत्यधिक परेशान हैं। उन्हें रातदृरातभर खेतों में पहरा देना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि नीलगायों के बढ़ते आतंक की सूचना कई बार गरोठ वन विभाग को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।