गरोठ। बोलिया कस्बे में बुधवार रात एक प्रेरणादायक पहल सामने आई, जब जैन स्थानकवासी समाज के वरिष्ठ श्रावक मोहनलाल चौधरी के निधन के पश्चात उनके परिवार ने स्वयं आगे बढ़कर नेत्रदान कराया। यह बोलिया कस्बे का पहला नेत्रदान है, जिसने पूरे क्षेत्र में मानवता और परोपकार की मिसाल कायम की है।
जैन स्थानकवासी श्री संघ अध्यक्ष सुरेश विजावत एवं व्यापारी प्रकाश भंडारी ने बताया कि बुधवार रात 9 बजे अनाज व्यापारी मोहनलाल चौधरी का हृदयाघात से निधन हो गया था। परिवार पहले से ही भवानीमंडी में किए जाने वाले नेत्रदान कार्यों से प्रभावित था। इसी प्रेरणा से सुंदरलाल चौधरी, विकेश चौधरी, मनोज चौधरी और पुत्र राकेश चौधरी ने मोहनलाल चौधरी के नेत्रदान का निर्णय लिया।
इसके बाद राकेश चौधरी के मित्र आकाश भंडारी के माध्यम से शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा के डॉ. कुलवंत गौड़ रात 2 बजे ज्योति रथ से बोलिया पहुंचे और नेत्रदान प्रक्रिया पूरी की।
गौरतलब है कि सूचना रात 11 बजे दी गई थी, परंतु कड़ाके की सर्दी के बावजूद डॉ. गौड़ स्वयं नेत्र संकलन वाहन चलाकर 150 किलोमीटर दूर बोलिया पहुंचे और 10 मिनट की रक्तहीन प्रक्रिया में कॉर्निया प्राप्त किया।
नेत्रदान के समय बड़ी संख्या में परिवारजन और नगरवासी मौजूद रहे। यह नेत्रदान को लेकर कस्बे में पहली बार जागरूकता का अवसर बना। लोगों ने उत्सुकता से प्रक्रिया देखी और समझा कि नेत्रदान में चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती तथा केवल आंखों की झिल्ली (कॉर्निया) ली जाती है, पूरी आंख नहीं निकाली जाती। नेत्रदान के पश्चात शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा परिवार को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।
डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि दिवंगत मोहनलाल चौधरी का कॉर्निया उत्कृष्ट अवस्था में मिला है, जिसे आई बैंक जयपुर भेज दिया गया है। यह दो नेत्रहीनों को रोशनी देने में सक्षम होगा। नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने इसे बोलिया कस्बे के इतिहास में पहला नेत्रदान बताते हुए परिवार के निर्णय की सराहना की।
मोहनलाल चौधरी के पुत्र राकेश चौधरी ने बताया कि उनके पिता धार्मिक और सेवाभावी स्वभाव के थे। “हम चाहते थे कि पिताजी के जाने के बाद भी उनकी आंखें किसी ज़रूरतमंद के काम आएँ। इसीलिए हमारा पहला निर्णय नेत्रदान का रहा। इससे हमें महसूस हो रहा है कि पिताजी मृत्यु के बाद भी किसी रूप में जीवित हैं।