प्रतापगढ़। रबी सीजन की बढ़ती मांग के बीच जिले में यूरिया खाद की भारी किल्लत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रतापगढ़, अरनोद, छोटीसादड़ी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में किसान कई दिनों से सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि सुबह होते ही समितियों के बाहर सैकड़ों किसानों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
किसानों ने बताया कि खाद की गाड़ी आने की सूचना मिलते ही वे देर रात से ही लाइन में लग जाते हैं, ताकि सुबह नंबर मिल सके। एक आधार कार्ड पर दो बैग की सीमा और प्रति बैग 270 रुपये की दर तय होने के बावजूद खाद मिलना सुनिश्चित नहीं हो रहा है। कतारों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी घंटों धूप में खड़ी रहीं।
किसानों का कहना है कि यूरिया उपलब्ध नहीं होने से गेहूं, चना, लहसुन, प्याज और मेथी जैसी रबी फसलों की पहली सिंचाई व टॉप ड्रेसिंग में देरी हो रही है। सप्ताहभर से लाइन लगाने के बावजूद खाद नहीं मिलने से खेतों का काम ठप पड़ा है, मजदूरी का नुकसान हो रहा है और किसानों को दिनभर बिना खाए-पिए कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है।
कई वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था और बहस की स्थिति भी देखने को मिली। सीमित आपूर्ति और बढ़ती मांग के कारण हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में तुरंत पर्याप्त मात्रा में यूरिया भेजा जाए, अधिक भीड़ वाले क्षेत्रों में अस्थायी वितरण केंद्र स्थापित किए जाएं और वितरण व्यवस्था को सख्ती से नियंत्रित किया जाए।
किसानों का कहना है कि यदि समस्या का समय पर समाधान नहीं हुआ तो रबी फसलों की उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा, जिससे जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।