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December 15, 2025, 4:15 pm
BIG NEWS : नीमच में सार्वजनिक घड़ियां बंद, व्यवस्था और सजगता पर सवाल, घंटाघर से टैगोर मार्ग तक ठहरी समय की सुई, वास्तु और विज्ञान दोनों में मानी जाती है अशुभ, जिम्मेदार अभी भी बेखबर, पढ़े खबर 

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नीमच। सार्वजनिक स्थानों पर लगी घड़ियों का बंद रहना सामान्यतः लापरवाही और अव्यवस्था का संकेत माना जाता है। वास्तुशास्त्र में घड़ी को समय, अनुशासन और निरंतर गति का प्रतीक बताया गया है, जबकि सामान्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चलती हुई सार्वजनिक घड़ियां किसी भी शहर की व्यवस्था, सजगता और नागरिक सुविधाओं की स्थिति को दर्शाती हैं।

नीमच शहर के प्रमुख मार्गों और बाजार क्षेत्रों में स्थापित ऐतिहासिक घड़ियां- चाहे घंटाघर हो या बौहरा बाजार के बाहर टैगोर मार्ग पर लगी सार्वजनिक घड़ी लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इन घड़ियों का बंद रहना जहां जिम्मेदार विभागों की अनदेखी को उजागर करता है, वहीं शहर की पहचान, सौंदर्य और विरासत को भी प्रभावित कर रहा है।

विद्वान पंडित राधेश्याम उपाध्याय एवं पंडित लक्ष्मण शास्त्री के अनुसार शास्त्रों में घड़ी को सकारात्मक ऊर्जा और प्रगति का प्रतीक माना गया है। उनका कहना है कि बंद घड़ी को अंधविश्वास से नहीं, बल्कि एक चेतावनी के संकेत के रूप में देखना चाहिए। सार्वजनिक स्थलों पर समय बताने वाले साधनों का बंद रहना आसपास के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे कार्यरत लोगों में सुस्ती और ठहराव की भावना उत्पन्न होने की आशंका रहती है, जिसका असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सार्वजनिक घड़ियों का बंद होना प्रशासनिक व्यवस्था में कमी और निगरानी के अभाव को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि घंटाघर जैसे स्थलों का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि नागरिक समय के प्रति सजग रहें और सार्वजनिक जीवन में अनुशासन बना रहे। आज इनका बंद रहना उसी सोच के विपरीत तस्वीर प्रस्तुत करता है।

यह सत्य है कि किसी शहर की प्रगति केवल घड़ियों के चलने से निर्धारित नहीं होती, लेकिन शहर की धरोहरों का सुचारु रूप से संचालित रहना यह अवश्य दर्शाता है कि जिम्मेदार सजग हैं और शहर जीवंत है।

नगर पालिका के अंतर्गत आने वाली इन ऐतिहासिक सार्वजनिक घड़ियों को पुनः चालू करने की मांग शहरवासी लंबे समय से कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि नीमच की पहचान और व्यवस्था दोनों को मजबूती मिल सके।
 

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