हरदा। 21 सूत्रीय मांगों को लेकर करणी सेना परिवार का जनक्रांति आंदोलन हरदा के नेहरू स्टेडियम में पूरे उफान पर है। हजारों की संख्या में जुटी भीड़ ने इस आंदोलन को जिले के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा जनआंदोलन बना दिया है। चारों ओर नारों की गूंज, मंच से तीखे संबोधन और अनुशासित जनसमूह ने पूरे शहर का माहौल बदल दिया है। हरदा का नेहरू स्टेडियम इस समय केवल एक आंदोलन स्थल नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और सम्मान की आवाज का प्रतीक बन चुका है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
हमारे साथ विश्वासघात हुआ है- शेरपुर
मंच से करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर जीवन सिंह शेरपुर ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “हमारे साथ विश्वासघात हुआ है। जब-जब समाज ने भरोसा किया, तब-तब उसे ठगा गया। अब आंदोलन के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सम्मान, न्याय और अधिकारों की है, जिसे अंतिम परिणाम तक पहुंचाया जाएगा।
अब जन-जन की आवाज बन चुका है आंदोलन-
वहीं राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने मंच से प्रशासन को आधे घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि 21 सूत्रीय मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन सड़क पर उतरेगा और भोपाल होते हुए दिल्ली तक कूच किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “हम 10 घंटे से अनुशासन में बैठे हैं, इसे हमारी कमजोरी न समझा जाए। मंच पर सर्व समाज मौजूद है और यह आंदोलन अब जन-जन की आवाज बन चुका है।
प्रशासन हाई अलर्ट पर, पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। हरदा जिले में पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रदर्शन स्थल से लेकर जिले के प्रवेश और निकास मार्गों तक कड़ी निगरानी रखी जा रही है। बाहर से बुलाए गए पुलिस बल के ठहराव के लिए शहर के लगभग 30 होटल और धर्मशालाएं प्रशासन के नियंत्रण में ली गई हैं। ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से भी लगातार निगरानी की जा रही है।
ये हैं करणी सेना परिवार की प्रमुख 21 सूत्रीय मांगें-
आंदोलन में रखी गई मांगों में न्यायिक जांच, झूठे मामलों की वापसी, आरक्षण एवं भर्ती प्रक्रिया में सुधार, आर्थिक आधार पर आरक्षण, किसानों से जुड़े मुद्दे, बिजली बिल और स्मार्ट मीटर से संबंधित समस्याएं, शिक्षा एवं रोजगार, महिला सुरक्षा, गो-संरक्षण, पूर्व सैनिकों और मीडिया कर्मियों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं।
पैदल यात्रा कर पहुंचे करणी सैनिक
आंदोलन में शामिल होने का जज्बा इस कदर है कि उज्जैन जिले के महिदपुर से 10 करणी सैनिक 9 दिनों में करीब 280 किलोमीटर पैदल चलकर हरदा पहुंचे। गोपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि वे 11 दिसंबर को जीवन सिंह शेरपुर के समर्थन में निकले थे। उनके साथ अर्जुन सिंह सुहागपुरा, अज्जू बना, कृष्णपाल बना, जयराज बना, दिलीप सिंह, हरिपाल सिंह, राजपाल सिंह, रितेश बना, भारती हाड़ा खिरकिया सहित अन्य साथी भी इस संघर्ष में शामिल हैं।
नीमच से भरी थी जनक्रांति न्याय यात्रा की हुंकार
उल्लेखनीय है कि करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ता एवं सर्व समाज आंदोलन के प्रमुख ठाकुर जीवन सिंह शेरपुर ने 2 दिसंबर को नीमच से जनक्रांति न्याय यात्रा की हुंकार भरी थी। नीमच पहुंचते ही कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला था। शेरपुर ने नीमच से ही 21 दिसंबर को हरदा में होने वाले जनक्रांति न्याय आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया था। उसी आह्वान का परिणाम है कि आज हरदा में हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ा है।