चित्तौड़गढ़। लघु उद्योग भारती महिला इकाई, चित्तौड़गढ़ द्वारा आयोजित स्वयं सिद्धा 2025 स्वदेशी मेला के दूसरे दिन आयोजन ने नई ऊर्जा, उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ। द्वितीय दिवस की शुरुआत से पूर्व, कल रात्रि आयोजित भव्य टैलेंट शो ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम की शुरुआत निर्भया सेना द्वारा प्रस्तुत महिला आत्मरक्षा कार्यशाला से हुई, जिसमें लाठी एवं ननचक्स के प्रदर्शन के माध्यम से महिलाओं की शक्ति और आत्मविश्वास का सशक्त संदेश दिया गया। रात्रि का समापन जय चित्तौड़ जय मेवाड़ टीम द्वारा प्रस्तुत "Valor of Chittorgarh" की प्रेरणादायी प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने मेवाड़ के शौर्य और गौरव को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके पश्चात कवि विष्णु पारीख एवं आयुषी शर्मा द्वारा भावपूर्ण काव्य पाठ प्रस्तुत किया गया। स्वयं सिद्धा 2025 के दूसरे दिन मेले में अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। शाम 5:00 बजे तक लगभग 1800 से अधिक आगंतुकों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे मेले की लोकप्रियता और स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ते विश्वास को स्पष्ट रूप से देखा गया। विश्व साड़ी दिवस के अवसर पर लघु उद्योग भारती महिला इकाई की ओर से एक विशेष रैम्प वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें महिला आगंतुकों, विक्रेताओं एवं महिला उद्यमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। नारी सौंदर्य, आत्मविश्वास और एकता का उत्सव मनाते हुए, महिला इकाई ने इस अवसर को "रंगीलो राजस्थान" की थीम के साथ जोड़ा और सभी सदस्यों ने लेहरिया परिधान धारण कर सांस्कृतिक एकजुटता का सुंदर संदेश प्रस्तुत किया। मेले को मिल रही शानदार प्रतिक्रिया को देखते हुए कई विक्रेताओं ने विशेष छूट एवं ऑफर्स की घोषणा की, जिससे आगंतुकों में और अधिक उत्साह देखने को मिला। शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भव्य टैलेंट शो हुआ। भावई नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से रंगीलो राजस्थान का उत्सव भी रहा। इसके अतिरिक्त, मेले में 5000 या उससे अधिक की खरीदारी करने वाले 15 भाग्यशाली विजेताओं को टीम लघु उद्योग भारती की ओर से आकर्षक उपहार भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती महिला इकाई की अध्यक्ष अंजलि शर्मा, सचिव सुरभि बल्दवा, कोषाध्यक्ष आस्था जैन, एवं मेला संयोजक राशि मूंदड़ा सभी समीक्षकों और चित्तौड़गढ़ के नागरिकों को उनके समर्थन और विश्वास के लिए धन्यवाद दिया। 22 दिसंबर, सोमवार, रात्रि 9:00 बजे समापन किया जाएगा। स्वयं सिद्धा 2025 का यह दूसरा दिन महिला उद्यमिता, स्वदेशी विचार, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।