नीमच। पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न, गच्छाधिपति परम पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. एवं आचार्य श्रीमद् विजय जयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती द्विशतावधानी मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. तथा मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. का सोमवार प्रातः नीमच सिटी की पावन धरा पर मंगल प्रवेश हुआ।
मंगल प्रवेश के अवसर पर नगर का वातावरण प्रातःकाल से ही धर्ममय एवं भक्तिमय हो गया। प्रातः 9 बजे सुंदर मरीन गार्डन से मंगल जुलूस प्रारंभ हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गों एवं मुख्य चौराहे से होता हुआ श्री शांतिनाथ जिनालय पहुँचा। वहाँ दर्शन-वंदन के पश्चात जुलूस नवीन उपाश्रय भवन पहुँचा।
नवीन उपाश्रय भवन में श्रीसंघ द्वारा पूज्य मुनिभगवंतों की अमृतवाणी का भावपूर्वक श्रवण किया गया। धर्माेपदेश में मुनिभगवंत ने कहा कि परमात्मा ने सभी जीवों को आत्मकल्याण का मार्ग प्रदान किया है। प्रभु के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए मन की शुद्धि अत्यंत आवश्यक है। मन स्वभाव से चंचल होता है कभी आसक्ति, कभी वैराग्य, कभी क्रोध तो कभी क्षमा की ओर प्रवृत्त होता है। ऐसे चंचल मन को स्थिर कर आत्मा की शुद्धता एवं स्वभावदशा की प्राप्ति करना ही साधना का मुख्य लक्ष्य है। पूज्य मुनिभगवंतों का नीमच सिटी में 23 दिसंबर तक स्थिरवास रहेगा। उक्त जानकारी श्रीसंघ प्रमुख गुणवन्तलाल सेठिया (अध्यक्ष) ने दी।