नीमच। श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा के श्रवण से सनातन और भारतीय संस्कृति का गहन ज्ञान प्राप्त होता है। यह मानव को कल्याण और मोक्ष का मार्ग दिखाती है। उक्त विचार पं. रमाकांत गोस्वामी महाराज ने व्यक्त किए। वे चौकन्ना बालाजी के समीप स्थित कमल अग्रसेन भवन सभागार में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा के द्वितीय दिवस प्रवचन कर रहे थे।
पं. गोस्वामी महाराज ने कहा कि भारतीय पुरातन संस्कृति ने पूरे विश्व को मार्गदर्शन दिया है और श्रीमद्भागवत उसका सशक्त माध्यम है। इसके श्रवण से मनुष्य पापकर्मों से दूर होकर पुण्य कर्मों की ओर अग्रसर होता है तथा आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में व्यक्ति धन अर्जन की अंधी दौड़ में तनावग्रस्त हो गया है। ऐसे में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मानसिक तनाव को दूर कर आत्मिक शांति प्रदान करता है। भागवत जीवन को सही दिशा और मोक्ष का मार्ग दिखाती है।
पं. गोस्वामी महाराज ने कहा कि भारत में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारतवंशी है और हर हिंदू परिवार में श्रीमद्भागवत का होना आवश्यक है। घर में विराजमान भगवान के समक्ष बैठकर कथा व कीर्तन करने से ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने भगवान का निरंतर नाम स्मरण करने, इंद्रियों पर संयम रखने और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि जल ही जीवन है, अतः नदियों में हवन सामग्री नहीं डालनी चाहिए। भगवान की भक्ति, सत्य और धर्म ही जीवन की सच्ची चाबी है। कथा के समापन पर आरती हुई तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।