प्रतापगढ़। आगामी फार्मासिस्ट भर्ती को मेरिट व बोनस आधारित करने की मांग को लेकर फार्मासिस्ट संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील चौधरी के नेतृत्व में प्रदेशभर के संविदा एवं निविदा फार्मासिस्टों तथा विभिन्न जिलों के जिला अध्यक्षों के प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने भर्ती विज्ञप्ति शीघ्र जारी कर उसे मेरिट व बोनस के आधार पर करने की मांग रखी।
प्रदेश अध्यक्ष सुनील चौधरी ने बताया कि चिकित्सा विभाग अंतर्गत मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के दवा वितरण केंद्रों पर पिछले कई वर्षों से संविदा एवं निविदा फार्मासिस्ट अल्प वेतन पर सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे अनुभवी कार्मिकों को नियमित करने के साथ ही आगामी भर्ती में उन्हें प्राथमिकता दिया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में फार्मासिस्टों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आमजन की सेवा की, लेकिन वर्तमान में सरकार उनकी अपेक्षाओं की अनदेखी कर रही है। सरकार द्वारा भर्ती को परीक्षा आधारित करने की मंशा संविदा व निविदा कार्मिकों के साथ न्यायसंगत नहीं है।
संघर्ष समिति ने नियम 1965 के तहत अनुभव व बोनस को प्राथमिकता देने की मांग करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के हजारों संविदा एवं निविदा फार्मासिस्टों को न्याय मिल सकेगा। इसी क्रम में समिति द्वारा प्रदेशभर में इकाई व संभाग स्तर पर सांसदों, विधायकों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर समर्थन जुटाया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में चिकित्सा विभाग में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के अंतर्गत लगभग 20 हजार दवा वितरण केंद्र संचालित हैं, जबकि केवल 4200 नियमित फार्मासिस्ट कार्यरत हैं, जो रोगी भार की तुलना में बेहद कम हैं। ऐसे में सरकार को शीघ्र फार्मासिस्ट भर्ती प्रक्रिया मेरिट व बोनस के आधार पर पूरी करनी चाहिए, अन्यथा आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
यह जानकारी फार्मासिस्ट संघर्ष समिति के प्रतापगढ़ जिला अध्यक्ष सुरेश चांदीवाल ने दी।