प्रतापगढ़। जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में एक देसी गाय पिछले 12 वर्षों से लगातार दूध दे रही है, जबकि उसने अंतिम बार 13 वर्ष पूर्व बछड़े को जन्म दिया था। यह जैविक रूप से असामान्य घटना क्षेत्र में चर्चा और आकर्षण का विषय बनी हुई है।
इस देसी गाय का स्थानीय नाम “मिला” है। इसके मालिक भगत राम पाटीदार (52) ने बताया कि गाय ने वर्ष 2013 में आखिरी बार बछड़ा दिया था, इसके बाद से अब तक निरंतर दूध उत्पादन जारी है। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से सुबह-शाम दुहाई की जाती है और कभी भी सूखा काल (ड्राय पीरियड) नहीं आने दिया गया। पशु चिकित्सकों के अनुसार यह स्थिति असामान्य अवश्य है, लेकिन उचित देखभाल में संभव भी है।
पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. अर्चना शर्मा के अनुसार सामान्यतः गाय को पुनः गर्भधारण कराना आवश्यक होता है ताकि दूध उत्पादन जारी रह सके, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में नियमित दुहाई, संतुलित पोषण और तनावमुक्त वातावरण के कारण लैक्टेशन अवधि लंबे समय तक बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक दुर्लभ जैविक प्रक्रिया (रेयर बायोलॉजिकल फिनॉमेनन) है, जिसे पशु के हार्मोनल संतुलन, पोषण और देखभाल से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
स्थानीय पशुपालक इस गाय को “भाग्यशाली” और “अनोखी देसी गाय” कहकर पुकारते हैं। आसपास के किसान और पशुपालक इससे यह सीख ले रहे हैं कि सही दुहाई तकनीक, संतुलित आहार और स्वच्छ वातावरण पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्राम सरपंच मोहनलाल जाट ने कहा यह हमारे गांव और जिले के लिए गर्व की बात है। इससे अन्य किसान भी प्रेरित होंगे और अपने पशुओं की बेहतर देखभाल करेंगे। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी भी पशु को समय-समय पर सूखा काल (ड्राय पीरियड) देना आवश्यक होता है। इसलिए यदि दूध उत्पादन में असामान्य स्थिति दिखाई दे, तो पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।