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March 5, 2026, 12:39 pm
KHABAR : नीमच में आस्था की मिसाल बनी ज़हरा, रमज़ान में तीन साल की मासूम ने रखा पहला रोज़ा, नन्हीं बच्ची ने दिखाया बड़ा हौसला, दिनभर निभाई रोज़े की नीयत, पढ़े खबर 

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नीमच। रमज़ान के मुबारक महीने में शहर से एक भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। पेशे से पत्रकार तबरेज़ अगवान की तीन साल दस महीने की बेटी ज़हरा फातिमा ने अपने जीवन का पहला रोज़ा रखकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

अलसुबह करीब तीन बजे घर में सेहरी की तैयारी चल रही थी। रसोई में हलचल थी और रोज़े की नीयत के साथ परिवार के सदस्य जाग रहे थे। तभी छोटी सी ज़हरा नींद से उठकर बाहर आई और जिज्ञासावश पूछा कि क्या हो रहा है। माता-पिता ने बताया कि वे रोज़ा रख रहे हैं, दिनभर कुछ नहीं खाएंगे और शाम को इफ्तार करेंगे।

यह सुनते ही ज़हरा ने भी रोज़ा रखने की इच्छा जताई। परिजनों ने इसे बच्चों की सहज जिद समझा, लेकिन उसने सेहरी में दाल-रोटी खाई, दूध पिया और खजूर लेकर पूरे आत्मविश्वास से रोज़ा रखने की नीयत कर ली।

दिनभर जब उसे खाने-पीने के लिए पूछा गया तो उसका जवाब एक ही था “मेरा रोज़ा है।” न तो उसने रोना-धोना किया और न ही किसी प्रकार की जिद की। शाम को अज़ान के साथ उसने मुस्कुराते हुए अपना पहला रोज़ा पूरा किया।

इस्लाम में रोज़ा बालिग होने के बाद फर्ज होता है, लेकिन कम उम्र में इबादत के प्रति यह लगन परिवार की परवरिश और धार्मिक वातावरण को दर्शाती है। ज़हरा की यह कोशिश मासूम आस्था और सब्र की प्रेरक मिसाल बन गई है।

रमज़ान रहमत, बरकत और सब्र का महीना है, और नीमच की यह नन्हीं बच्ची उसी सब्र और श्रद्धा की सुंदर तस्वीर बनकर उभरी है।

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