जतारा। भांजे ने निकाली अपने मामा की डीजे पर शव यात्रा आपको बता दें पं धर्मदास पटेरिया पुजारी जिनका जन्म 1./2/ 1924 को पलेरा जनपद पंचायत के पहाड़ी बुजुर्ग ग्राम में हुआ था और यह मंदिर के पुजारी थे। इनकी एक बहन थी उनकी दो संतान है थी जब इनके बहन और बहनोंई की मृत्यु हो गई तब उनके दोनों भांजे छोटे थे तो उन्होंने ही उन अपने छोटों भांजो को पाला पोसा और बड़ा किया पढ़ाया लिखाया नौकरी की लगवाई इन्होंने जब उनकी बहन ने इसने अंतिम विदाई दी तभी इन्होंने मन में संकल्प लिया कि मैं अपने ही दोनो भांजो को अपनी औलाद की तरह पालूंगा और अपनी बहन को दिए वादे की अनुसार उन्होंने शादी नहीं की शादी नही की और उन्होंने अपनी बहन से किए वादे को अंतिम सांस तक पूरा किया उन्होंने अपने दोनों भांजो के नाम करीब चालीस चालीस एकड़ से भी ज्यादा जमीन उनके नाम की घर मकान जो पैसा था सब अपने दोनों भांजो के नाम पर कर दिया जो और जब उन्होंने आज अंतिम सांस ली तो उसके बाद उनके भांजो ने उनके जो भी सगे संबंधी थे उन्होंने आज उनकी अंतिम यात्रा को डीजे के माध्यम से निकला जब पुजारी की पुजारी धर्मदास जी की अंतिम यात्रा पहाड़ी गांव में से निकली तो सभी की आंखें नम और लोगों की जुबान पर एक ही बात थी कि आज की इस मतलबी दुनिया में पुजारी धर्मदास जी ने अपना धर्म बहुत ही सुंदर तरीके से निभाया।