नीमच। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ने के बाद दोपहिया वाहन चालकों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। बाइक और स्कूटर का चलते-चलते बंद हो जाना, स्टार्टिंग में दिक्कत, पिकअप कम होना तथा बार-बार खराबी आना अब आम शिकायत बन चुकी है। हालात यह हैं कि मरम्मत के कुछ ही घंटों बाद वाहन फिर खराब हो रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं का खर्च लगातार बढ़ रहा है और भरोसा भी प्रभावित हो रहा है।
कार्बाेरेटर और फ्यूल सिस्टम में आ रही दिक्कतें-
नीमच के मैकेनिक मकबूल खान, संतोष कुमार, छोटू एवं राजेंद्र राठौर के अनुसार इन दिनों रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे वाहन आ रहे हैं, जिनमें फ्यूल सिस्टम और कार्बाेरेटर से जुड़ी गंभीर समस्याएं देखने को मिल रही हैं। चलते वाहन का अचानक बंद होना, एक्सीलेरेशन पर झटके आना और स्टार्ट न होना आम हो गया है। उनका कहना है कि हर दूसरे वाहन में इस प्रकार की समस्या सामने आ रही है।
इथेनॉल नमी सोखकर बढ़ा रहा तकनीकी जोखिम-
वाहन पार्ट्स विक्रेता एवं जानकार दीपक असनानी के अनुसार इथेनॉल वातावरण से नमी को तेजी से सोखता है। यह नमी पेट्रोल में मिलकर तकनीकी समस्याओं को जन्म देती है। इसके कारण कार्बाेरेटर के जेट्स ब्लॉक हो जाते हैं, मेटल पार्ट्स में जंग लगने लगती है और इंजन को शुद्ध ईंधन नहीं मिल पाता। खासकर पुराने और कार्बाेरेटर आधारित वाहनों में यह समस्या अधिक गंभीर हो रही है।
पावर पेट्रोल’ से कुछ हद तक राहत-
मैकेनिकों के अनुसार “पावर पेट्रोल” के उपयोग से ऐसी समस्याएं अपेक्षाकृत कम देखने को मिल रही हैं, हालांकि यह समाधान सभी के लिए व्यावहारिक नहीं है।
वाहन चालकों की बढ़ी चिंता-
बार-बार सर्विसिंग और बढ़ते खर्च से वाहन चालक परेशान हैं। लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आम आदमी के लिए दोपहिया वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।
नीति में संतुलन जरूरी-
गौरतलब है कि इथेनॉल मिश्रण की नीति को लागू करते समय वाहन तकनीक, ईंधन गुणवत्ता नियंत्रण और आमजन की सुविधा के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गहराने की आशंका है।