नीमच। मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में सबसे चर्चित कानूनों में शामिल एनडीपीएस एक्ट को लेकर नीमच बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष जोशी ने एक इंटरव्यू में कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि एनडीपीएस मामलों में अक्सर मादक पदार्थों के साथ पकड़े जाने वाले व्यक्ति केवल कैरियर होते हैं, जबकि कथित तौर पर पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य लोग जांच की पहुंच से बाहर रह जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के तूफान सिंह फैसले सहित न्यायिक निर्णयों का दिया हवाला-
वरिष्ठ अधिवक्ता जोशी ने कहा कि पुलिस या नारकोटिक्स अधिकारियों के समक्ष हिरासत में दिए गए किसी कथित बयान को अपने आप में किसी अन्य व्यक्ति को दोषी ठहराने का आधार नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार, धारा 27 और धारा 67 से जुड़े बयानों के आधार पर किसी अन्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई या दोषसिद्धि के लिए स्वतंत्र एवं ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तूफान सिंह फैसले सहित न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि केवल कथित स्वीकारोक्ति या बयान के आधार पर किसी व्यक्ति को सजा नहीं दिलाई जा सकती, जब तक उसके खिलाफ अन्य साक्ष्यों से कथित संलिप्तता स्थापित न हो।
कैरियर पकड़ा जाता है, असली नेटवर्क तक नहीं पहुंचती जांच-
अधिवक्ता मनीष जोशी ने कहा कि उनके आकलन के अनुसार एनडीपीएस के कई मामलों में मादक पदार्थों के साथ पकड़े जाने वाले लोग केवल कैरियर की भूमिका में होते हैं। उन्होंने कहा कि कम पैसे के बदले दूसरे लोगों के कहने पर मादक पदार्थ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले व्यक्ति कानून की गिरफ्त में आ जाते हैं, जबकि कथित रूप से उनके पीछे काम करने वाले लोगों तक जांच पहुंचना चुनौती बना रहता है।
सिर्फ बयान नहीं, ठोस सबूत जरूरी-
वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष जोशी ने कहा कि किसी आरोपी के बयान में दूसरे व्यक्ति का नाम आने मात्र से उसे आरोपी बनाना पर्याप्त नहीं है। कथित संलिप्तता साबित करने के लिए कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन, डिजिटल साक्ष्य या अन्य स्वतंत्र प्रमाण जरूरी हैं। जांच एजेंसी को आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्क, लेन-देन और घटना के समय की गतिविधियों के प्रमाण जांच का हिस्सा होने चाहिए।
धारा 27 और 67 की भूमिका को लेकर गलतफहमी-
वरिष्ठ अधिवक्ता ने धारा 27 और धारा 67 से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी अपनी कानूनी व्याख्या रखी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान अधिकारियों द्वारा दर्ज किए जाने वाले बयानों का उपयोग जांच को आगे बढ़ाने और सुराग तलाशने में हो सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए अदालत के समक्ष स्वीकार्य एवं स्वतंत्र साक्ष्यों का महत्व बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में किसी भी आरोपी के खिलाफ मामला तभी मजबूत होता है, जब अभियोजन आरोपों को अन्य विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित कर सके।
एनडीपीएस मामलों में बड़ी मछलियों तक पहुंचना जरूरी-
अधिवक्ता मनीष जोशी ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए केवल कैरियरों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। जांच एजेंसियों को पूरी सप्लाई चेन और मुख्य आरोपियों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में गिरफ्तार लोग कैरियर की भूमिका में हो सकते हैं, इसलिए जांच को नेटवर्क के वास्तविक संचालकों तक पहुंचाना चाहिए।
5-10 हजार रुपए के लिए कैरियर बनने वालों का भविष्य दांव पर-
जोशी ने कहा कि कम रकम के लालच में मादक पदार्थों की खेप पहुंचाने वाले युवाओं और अन्य लोगों का भविष्य गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में केवल बरामदगी तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक तभी संभव है, जब जांच की दिशा कैरियर से आगे बढ़कर कथित सप्लाई नेटवर्क और उसके संचालकों तक पहुंचे।
कानूनी प्रक्रिया में स्वतंत्र साक्ष्य का महत्व-
वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष जोशी के बयान का मुख्य सार यही है कि एनडीपीएस मामलों में किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र, विश्वसनीय और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों से साबित करना आवश्यक है। किसी आरोपी के कथित बयान में किसी अन्य व्यक्ति का नाम आने मात्र से उस व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती। उनके इस बयान ने क्षेत्र में एनडीपीएस मामलों की जांच, कैरियरों की गिरफ्तारी और कथित बड़े तस्करी नेटवर्क तक जांच पहुंचने को लेकर नई बहस छेड़ दी है।