BREAKING NEWS
BIG NEWS : कुकड़ेश्वर में आवारा मवेशियों का बढ़ता.. <<     BIG UPDATE: मोहन सरकार का दीपावली पर महिलाओं को.. <<     VIDEO: चुनाव में बड़े-बड़े वादे, नतीजों के बाद.. <<     BIG NEWS : सफेद दूध के पीछे छिपा था मिलावट का काला.. <<     KHABAR : डॉ. नरोत्तम मिश्रा का कांग्रेस पर तीखा.. <<     KHABAR : मध्यप्रदेश का 71वां स्थापना दिवस.. <<     KHABAR : मंदसौर में 70वीं राज्य स्तरीय रोलर.. <<     NEWS : चित्तौड़गढ़ पुलिस लाइन में सरदार पटेल की.. <<     KHABAR : घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाकर निकला संघ.. <<     KHABAR : देवास में शटर उचकाकर चोरी करने वाले गिरोह.. <<     KHABAR : धरती का भविष्य बचाने के लिए गरोठ से अनोखी.. <<     KHABAR : कांग्रेस की वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली पर.. <<     SHOK SAMACHAR : नहीं रही कलावती वर्मा, परिवार में शोक.. <<     NEWS : बांद्रा-उदयपुर सुपरफास्ट ट्रेन का कपासन.. <<     KHABAR : ग्राम बापचा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ.. <<     GOLD & SILVER RATE : यहां क्लिक करेंगे तो जानेंगे प्रदेश.. <<     HOROSCOPE TODAY : कर्क और कुंभ राशि वालों को मिल सकता है.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
September 1, 2026, 10:14 am
NEWS : फेज-6 योजना के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर न्यायिक कार्यों का बहिष्कार, लक्षित प्रकरणों के निस्तारण में न्याय की गुणवत्ता और निष्पक्ष सुनवाई को प्राथमिकता देने की मांग, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

Share On:-

चित्तौड़गढ़। न्याय की गुणवत्ता एवं निष्पक्षता बनाए रखते हुए लक्षित प्रकरणों के निस्तारण संबंधी योजना फेज-6 को लेकर जिला अभिभाषक संस्थान चित्तौड़गढ़ के अधिवक्ताओं ने विरोध जताया। संस्थान अध्यक्ष नरेश शर्मा की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं ने काली पट्टी बांधकर न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट एवं राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम ज्ञापन मुख्य पीठासीन अधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया।

संस्थान अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि न्यायालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति केवल शीघ्र निर्णय नहीं, बल्कि निष्पक्ष, तर्कपूर्ण और न्यायसंगत निर्णय की अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि प्रकरणों का निस्तारण न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन निर्णय तथ्यों, साक्ष्यों और लागू कानून के समुचित परीक्षण के आधार पर होना चाहिए। केवल संख्यात्मक लक्ष्य अथवा निर्धारित समयसीमा के आधार पर प्रकरणों के निस्तारण से न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।

5 वर्ष से कम पुराने प्रकरणों को लक्षित श्रेणी में शामिल करने पर आपत्ति
अधिवक्ताओं ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत अधीनस्थ न्यायालयों में लक्षित प्रकरणों के निस्तारण के लिए फेज-6 कार्ययोजना लागू की गई है। उनके अनुसार, पूर्व में इस प्रकार की योजनाओं का उद्देश्य मुख्य रूप से 20 वर्ष या उससे अधिक पुराने प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण था, जबकि वर्तमान चरण में 5 वर्ष से कम पुराने प्रकरणों को भी लक्षित श्रेणी में शामिल किया जा रहा है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे न्याय की गुणवत्ता के बजाय संख्यात्मक निस्तारण को प्राथमिकता मिलने की आशंका है। इससे पर्याप्त सुनवाई, साक्ष्यों के मूल्यांकन और कारणयुक्त निर्णय जैसे न्यायिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, लक्षित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण का दबाव अधिवक्ताओं की कार्यप्रणाली और निजी जीवन को भी प्रभावित कर सकता है।

ज्ञापन में रखीं विभिन्न मांगें
ज्ञापन में फेज-6 के तहत 5 वर्ष से कम पुराने प्रकरणों को लक्षित श्रेणी में शामिल करने के निर्णय की समीक्षा एवं निरस्तीकरण की मांग की गई। इसके साथ ही प्रकरणों के निस्तारण में संख्यात्मक लक्ष्य के बजाय न्याय की गुणवत्ता, निष्पक्ष सुनवाई और कारणयुक्त निर्णय को प्राथमिकता देने की मांग रखी गई।

अधिवक्ताओं ने न्यायालयों की वास्तविक क्षमता एवं प्रकरणों की जटिलता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारण में लचीलापन रखने, न्यायिक अधिकारियों के मूल्यांकन में निर्णय की गुणवत्ता एवं विधिक शुद्धता को महत्व देने, न्यायालयों तथा न्यायिक-सहायक पदों की संख्या बढ़ाने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।

इसके अलावा नई योजनाएं लागू करने से पहले न्यायिक अधिकारियों एवं बार संस्थाओं से प्रभावी परामर्श, पुराने प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के लिए अतिरिक्त पीठ एवं विशेष सुनवाई, मध्यस्थता तथा आधुनिक केस मैनेजमेंट व्यवस्था अपनाने की मांग भी की गई।

अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण विरोध को संस्थागत संवाद के माध्यम से समाधान का अवसर देने तथा बांसवाड़ा के नवीन न्यायालय परिसर में न्यायालयों के स्थानांतरण से पहले अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त चौंबर, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में रखी।

विरोध के दौरान संस्थान के उपाध्यक्ष चांदनी बैरागी, सचिव लोकेन्द्र सिंह राणावत, सहसचिव विशाल सिंह भाटी, कोषाध्यक्ष कमलेश सुखवाल, पुस्तकालय प्रभारी रोहित खटीक सहित वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला अभिभाषक संस्थान के बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE