नीमच। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंदों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। संत रविदास स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर नीमच जिले के ग्राम कराडिया महाराज निवासी तनसुख लाल पिता कैलाश चंद्र ने अपना स्वरोजगार का सपना साकार किया है। आज वे खाद-बीज भंडार का सफलतापूर्वक संचालन कर प्रतिमाह करीब 30 से 40 हजार रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं।
तनसुख लाल को संत रविदास स्वरोजगार योजना के तहत जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता मिली। योजना के अंतर्गत उन्हें भारतीय स्टेट बैंक, जीरन शाखा से 7 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ। इसी राशि का उपयोग कर उन्होंने खाद-बीज भंडार शुरू किया और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
नियमित आय से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति-
व्यवसाय शुरू होने के बाद तनसुख लाल की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार आया। वर्तमान में खाद-बीज भंडार से उन्हें प्रतिमाह लगभग 30 से 40 हजार रुपए की आय हो रही है। नियमित आमदनी से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनमें आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन की भावना भी बढ़ी है।
तनसुख लाल बताते हैं कि स्वयं का व्यवसाय शुरू करना उनका सपना था, लेकिन आर्थिक संसाधनों के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था। संत रविदास स्वरोजगार योजना और जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के सहयोग से उन्हें आवश्यक वित्तीय संबल मिला और वे अपना व्यवसाय शुरू कर सके। आज वे स्वयं अपने कारोबार का संचालन कर मेहनत के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
जिले में कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में विभिन्न स्वरोजगार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकें।
तनसुख लाल ने स्वरोजगार स्थापित करने में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि शासन की योजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। आज उनका खाद-बीज भंडार केवल आय का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुका है।