मंदसौर। राजस्थान पुलिस की हिरासत में तबीयत बिगड़ने के करीब 13 दिन बाद मंदसौर निवासी 19 वर्षीय ऋतुराज लोहार की 5 अक्टूबर को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस पर मारपीट और टॉर्चर करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मारपीट के दौरान ऋतुराज के सिर में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद वह कोमा में चला गया। वहीं, पुलिस ने टॉर्चर के आरोपों से इनकार किया है। मामले में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और IPS स्तर के अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ऋतुराज का पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद परिजन शव लेकर मंदसौर रवाना हो गए। पुलिस के अनुसार, ऋतुराज को 22 सितंबर को विदेश से सस्ता सोना लाने के नाम पर कथित ठगी के मामले में पकड़ा गया था।
पिता का आरोप- बेटे पर लगाया गया 22 लाख की ठगी का झूठा आरोप-
ऋतुराज के पिता प्रकाश लोहार ने आरोप लगाया कि पुलिस की मारपीट से उनके बेटे के सिर में चोट लगी थी। सिर के अंदर ब्लीडिंग होने के बाद वह कोमा में चला गया और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
प्रकाश ने बताया कि वह दुबई में वेल्डिंग का काम करते हैं। जयपुर निवासी मनोज ने उन्हें दुबई से सोना लाने के लिए 3.5 लाख रुपए दिए थे। सोना नहीं ला पाने पर उन्होंने 17 सितंबर को जयपुर पहुंचकर मनोज को पूरी रकम वापस कर दी थी। उस समय उनका बेटा ऋतुराज भी उनके साथ था।
प्रकाश के मुताबिक, जयपुर एयरपोर्ट के बाहर कुछ लोगों ने खुद को क्राइम ब्रांच का सदस्य बताते हुए उनके सामान की तलाशी ली और उन पर 22 लाख रुपए के सोने की ठगी का आरोप लगाया। हालांकि तलाशी में कुछ नहीं मिलने का दावा परिजनों ने किया है।
पिता के अनुसार, इसके बाद दोनों को रियांश होटल ले जाकर बंधक बनाकर रखा गया। प्रकाश 21 सितंबर को वहां से निकल गए, जबकि ऋतुराज वहीं रह गया। इसके बाद उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया। 22 सितंबर को उसे राजस्थान के मुहाना थाने लाया गया।
पिता बोले- बेटे का सिर दीवार से मारा-
प्रकाश लोहार का आरोप है कि मुहाना थाने में ऋतुराज के साथ मारपीट की गई और उसका सिर दीवार से मारा गया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उसे पहले लकी हॉस्पिटल और फिर नारायणा अस्पताल ले जाया गया। 23 सितंबर को उसे एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब 13 दिन तक उसका इलाज चला। 5 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
प्रकाश ने सवाल उठाया कि जब मनोज को 3.5 लाख रुपए वापस किए जा चुके थे, तो 22 लाख रुपए की ठगी की शिकायत किस आधार पर की गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और बेटे के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अलग-अलग नाम से अस्पताल में भर्ती कराने का आरोप-
परिजनों का आरोप है कि ऋतुराज को मुहाना के लकी हॉस्पिटल में ‘ऋषिराज’ नाम से भर्ती कराया गया। इसके बाद नारायणा अस्पताल में उसे ‘ऋतु’ नाम से भर्ती कराने की बात सामने आई। अगले दिन 23 सितंबर को पुलिस उसे एसएमएस अस्पताल लेकर पहुंची।
लकी हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अनिल जैन के मुताबिक, युवक को शाम करीब 4:15 बजे अस्पताल लाया गया था। करीब तीन घंटे बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टर ने उसे आरयूएचएस या महात्मा गांधी अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी।
डॉक्टर बोले- सिर में थी गंभीर चोट-
ऋतुराज के दो CT स्कैन किए गए थे। एक नारायणा अस्पताल और दूसरा एसएमएस अस्पताल में हुआ। दोनों जांचों में सिर के अंदर चोट सामने आने की बात कही गई है।
एसएमएस अस्पताल में उपचार करने वाले डॉ. श्रीकांत शर्मा के अनुसार, ऋतुराज के ब्रेन में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी पाई गई थी। डॉक्टर ने बताया कि इस तरह की चोट मारपीट, उल्टा लटकाने, किसी अन्य प्रकार की चोट या अन्य कारणों से हो सकती है। चोट किस वजह से लगी, यह केवल CT स्कैन के आधार पर निश्चित नहीं किया जा सकता। इसके लिए आगे की जांच आवश्यक हो सकती है।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि नारायणा अस्पताल में पुलिस की ओर से ऋतुराज के सांप के काटने की बात बताई गई थी। अस्पताल में उसे 10 एंटीवेनम इंजेक्शन दिए जाने की बात भी सामने आई है। परिवार का कहना है कि उसके शरीर पर सांप के काटने का कोई निशान नहीं था।
मानवाधिकार आयोग ने मांगी CCTV फुटेज-
ऋतुराज की मौत के बाद राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जीआर मूलचंदानी ने जयपुर पुलिस कमिश्नर, जयपुर जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (मानवाधिकार) से रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने मुहाना थाने के संबंधित समय की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और उसे सीलबंद स्थिति में आयोग के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की प्रभावी जांच IPS स्तर के अधिकारी से कराने को कहा गया है। अनुपालन रिपोर्ट और सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर को सुबह 11 बजे पत्रावली आयोग के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस ने टॉर्चर के आरोपों से किया इनकार-
मुहाना थाना प्रभारी मुकेश खराड़िया ने पुलिस पर लगाए गए टॉर्चर के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि मामला विदेश से सस्ता सोना लाने के नाम पर 22 लाख रुपए के लेनदेन और कथित ठगी से जुड़ा है। उनके अनुसार, प्रकाश के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज था और ऋतुराज को मनोज 21 सितंबर को थाने लेकर आया था। इसके बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई।
पुलिस का कहना है कि ऋतुराज के साथ मारपीट या टॉर्चर नहीं किया गया। मामले की जांच एसीपी स्तर पर की जा रही है।
परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग-
राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राइका ने मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऋतुराज गाड़िया लोहार समुदाय से था और उसकी मौत के मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
राइका के अनुसार, ऋतुराज की मां हेमा बाई की शिकायत पर मुहाना थाने में बंधक बनाने और मारपीट का मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि परिवार को न्याय नहीं मिलने पर डीएनटी संघर्ष समिति आंदोलन करेगी।