रतनगढ। नगर में घाट निर्माण एवं सड़क चौड़ीकरण से रहवासियों में विकास की उम्मीद जगी थी। नीमच-सिंगोली रोड के दोनों तरफ लगभग 150 से भी अधिक दुकानदार एवं रहवासी मकान मालिक कई वर्षों से व्यापार व्यवसाय कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
ज्ञात रहे कि रतनगढ़ में गुंजाली नदी पुलिया से घाट सेक्शन तक 3.6 किमी लम्बे व 24.13 करोड़ रुपये की लागत के इस घाट सेक्शन के चौड़ीकरण से बार-बार जाम लगने की गंभीर समस्या से मुक्ति, परिवहन व्यवस्था में सुधार के साथ ही स्थानीय व्यापारियों के व्यापार व्यवसाय में भी वृद्धि होने की पूरी उम्मीद जगी थी। लेकिन जैसे ही रोड के दोनों तरफ पानी निकासी हेतु शुरू किये गये निर्माणाधीन नाले की ऊंचाई को देखकर नीमच सिंगोली रोड के दोनों तरफ के रहवासी व व्यापारियों के माथे पर अपने व परिवार की रोजी रोटी के जुगाड एवं भविष्य की चिंता की लकिरे उभर आई। क्योंकि निर्माणाधीन नाले की ऊंचाई देखने के बाद सभी रहवासियों एवं व्यापारियों की दुकाने एवं मकान पूरी तरह से दबने के साथ ही अंदर आने जाने का रास्ता भी पूरी तरह से बंद हो जाएगा।
व्यापारियों के अनुसार जहां एक तरफ मुख्यमंत्री रोजगार देने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कहीं यह विकास इनका व्यापार व्यवसाय चौपट कर बेरोजगार कर उन्हें पूरी तरह से विनाश एवं बर्बादी की कगार पर ना पहुंचा दे। इस मामले मे आक्रोशित सैकडो रहवासियों एवं व्यापारियों ने नायब तहसीलदार मोनिका जैन को उच्चाधिकारियों के नाम ज्ञापन देकर रोड की ऊंचाई 3 से 4 फीट कम करने एवं नाला निर्माण को तुरंत बंद करने की मांग की। ज्ञापन का वाचन राजेश लढा के द्वारा किया गया।
भारी विरोध को देखते हुए नायब तहसीलदार जैन ने उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देश पर एमपीआरडीसी के इंजीनियर सुपेकर एवं रोड निर्माण ठेकेदार को बुलाकर निर्माणाधीन नाले का मौका मुआयना कर दिवार को तुड़वाकर मकानों में आने जाने का रास्ता शुरू करवाया।
संतोष सुपेकर संभागीय इंजीनियर एमपीआरडीसी का कहना है कि स्थानीय रहवासियों की परेशानी को देखते हुए अभी निर्माणाधीन नाले की दिवारों को हटाया जा रहा है। शीघ्र ही उच्चाधिकारियों से चर्चा कर नाले व रोड की ऊंचाई को कम करने का प्रयास करेंगे जिससे कम से कम नुकसान हो।