भवानी मंडी। क्षेत्र के सनखेडी गाँव में चल रही श्री मद् भागवत कथा के आखरी दिन मुख्य जजमान सुरेश गोयल ने पत्नी सहित कथा के बीच मंच पर जाकर जनता जनार्दन के दर्शन कर कथा सुनने आये सभी भक्तों को प्रणाम किया। वहीं कथा वाचक संत ने बताया कि मन को एक जगह लगाओ, एक निष्ठ रहो, कि मेरे भगवान श्री कृष्ण ही है, श्री राम जी ही है, हनुमान जी ही है। सब जगह बैठो, उठों, पर मन में अपने भगवान के प्रति एकनिष्ट रखो। किसी भी मंदिर में जाओ, किसी भी देव को प्रणाम करो, पर सब जगह अपने इष्ट को मानकर ही प्रणाम करो। किसी भी धर्म की बुराई मत करो, किसी पंत की बुराई मत करो, पर मीरा की तरह भाव यह रखो, मेरे तो गीरधर नागर दूसरों का ना कोई, आज के समय में लोग एक दूसरे पंत की बुराई करने में अपना समय गंवा रहे हैं। आपका कोई भी काम किसी के माध्यम से हो सकता हैं। यहां कोई भी आपकी मदद कर सकता हैं पर मदद करने वाले को धन्यवाद देकर अपने इष्ट का धन्यवाद करो क्योंकि हकिकत में सब कुछ वहीं करता है। कोई भी आपकी मदद कर रहा है यह सब उस परमात्मा की कृपा से ही कर रहा है।
बताया की इस संसार में हमको रहना नही है वंहा लोगो ने रात दिन एक कर रखा है, पर जंहा जाना है, गोलोक धाम में, वंहा की कोई बात ही नहीं करता है आखीर यंहा कितने दिन रहोगे फीर भी सारा जीवन खाने कमाने में ही समाप्त कर दिया है। यह मकान, दुकान ओर खाने कमाने की व्यवस्था तो जीवन यापन के लिए होती हैं पर इसी में सारा जीवन मत बिताओ । सारे पुजा, पाट, वृत, उपवास केवल मन को भगवान के चरणों में लगाने के साधन है।
सत्संग मे हमको अपनी सोंच सही करनी है ओर सही सोंच रहेगी तो अच्छी पंहुच हो । परिवार में बहु की सोंच यह होनी चाहिये कि सास, ससुर मेरे माता पिता ही है ओर सास, ससुर की सोंच यह होनी चाहिए की बहु हमारी बेटी है, ऐसी सोंच रखो फिर देखो घर में सारे झगडे समाप्त हो जायेंगे। सोंच यह रखो की लोग मुझे कितना भी भला बुरा कहे पर में किसी को भला बुरा नही कहूंगा। जिनकी सोंच सही रहती हैं वही बांद में संत हो जाते है ।
बताया कि संत का कोई समाज नही होता है जिसकी सोंच अच्छी हे वही संत है संतो ने कभी किसी का बुरा नही सोंचा हे । भगवान श्री कृष्ण को लोगो ने कितना भला बुरा कहा हे पर उनकी सोंच सही थी इसलिए उन्होंने कहने वालो की चिंता नही की।
बताया कि भगवान के भक्तों का कभी अपमान मत करना क्योंकि जिन घरों में भक्तों का अपमान हुआ है वंहा फिर अमंगल हुआ है। राणा ने मीरा बाई को दुख दिया इसलिए फिर वंहा काल पड गया था, सुखा पड गया था । रावण ने विभिषण को घर से निकालने के बाद ही रामजी ने लंका पर आक्रमण किया था, उधर महाभारत में जब विदुर को दुर्याेधन ने घर से निकाला उसके बाद ही महाभारत का युद्ध हुआ जिसमें दुर्याेधन परिवार समेत समाप्त हो गया था इसलिए भगवान के भक्तों का कभी अपमान नही करना चाहिए भक्तों का अपमान भगवान से सहन नही होता है।
संसार में दुख नही है, पर संसार से सुख लेने की इच्छा ही दुख का कारण बनती है। दुख आये तो किसी के आगे जाकर मत रोना क्योंकि यंहा सभी दुखी है, रोना है तो भगवान के आगे जाकर रोना। बताया भगवान सहायता उसी की करते जो उसको भाव से पुकारते हे, कभी भी जीवन में दुख आये तो उस समय भगवान को करुण भाव से पुकारो करो, वह जरूर भी आते हैं।
हम चाये यही वरदान, सबको सुखी रखे भगवान पर महिला पुरूष सब ने झूमकर नृत्य किया इससे पहले कथा के आरम्भ में कथा के जजमान सुरेश गोयल, राजू गोयल ने सपरिवार भागवत् जी की पुजा आरती की