मोरवन। समीपस्थ प्राचीन स्थल सांडेश्वर महादेव में चल रही सात दिवसीय महाशिवपुराण कथा का आज रविवार को विश्राम हुआ। कथा के अन्तिम दिन कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त पहुंचे। कथा प्रारम्भ से पूर्व व्यासपीठ की विधिवत् पूजा, अर्चना और आरती आज कथा के मुख्य यजमान ने करी।
श्री शिव महापुराण कथा व्यासपीठ पर कथावाचक श्री महामंडलेश्वर 1008 हेमानंद जी सरस्वती महाराज ने कथा के अंतिम दिन द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव, जो स्वयं में महाकाल हैं, जिनका काल भी कुछ बिगाड़ नहीं सकता, जिनके दर्शन मात्र से मोक्ष प्राप्ति होती है, भूत, भविष्य और वर्तमान के ज्ञाता हैं। पृथ्वी पर वह ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विद्यमान हैं। भारत में अलग-अलग जगहों पर उनके 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, जिनके दर्शनों से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, दुख दूर होते हैं, धन-संपदा, वैभव, प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति प्रतिदिन इन 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम जपता है, वह सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। मनोकामना की पूर्ति के लिए इन ज्योतिर्लिंगों के नामों का जाप किया जाता।
हेमा नंद सरस्वती जी ने आगे कहा कि वर्ष में दो शिवरात्रि आती है इस में जो व्यक्ति उपवास करता है रात्रि में चारों पहर भगवान शिव की विधि विधान से पूजा अर्चना करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। उसके हर दुख दर्द दूर हो जाते हैं और भगवान शिव की उस पर विशेष कृपा रहती है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव लोक कल्याण के लिए लिंग के रूप में वास करते हैं । भारतवर्ष में यह 12 ज्योतिर्लिंग अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं। मान्यता है कि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है चलते फिरते भाव से कुभाव से जेसे भी जो भगवान का सुमिरन करता है उसका कल्याण होता है भगवान का नाम कल्याण कारी है। इसी के साथ आज सात दिवसीय महाशिवपुराण कथा का विश्राम हुआ।
कथा समाप्ति के बाद हवन की पूर्णाहुति हुई। समिति द्वारा सात दिन तक संगीत सेवा देने वाले, लाइट डेकोरेश, साउंड सिस्टम, लाइव प्रसारण, टेंट व केमरामैन आदि का व्यासपीठ से सम्मान किया गया।
आज कथा के विश्राम के बाद परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। रूपपुरा, लालपुरा, चौकानखेड़ा, केलूखेड़ा, बावल, जूनी बावल, जावद, मेलाना, मोरवन, बसेड़ी भाटी, गणेशपुरा, सरवानिया महाराज, धामनिया सहित 18 गांव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।