चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र प्रताप नगर पर आज 26वा स्थापना दिवस मनाया गया। सेवा केंद्र संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी ने बताया की आज सेवा केंद्र को स्थापित किए 26 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ईश्वरीय सेवा के मार्ग में अपना अनुभव बताते हुए कहा कि जब हम परमात्मा से सर्व संबंध जोड़ते हैं उन्हें निभाते हैं और याद करते हैं तो हमारे सभी संबंधों में श्रेष्ठता आती है। उनके संबंध भी उतने ही मधुर होते हैं हर एक आत्मा के संबंध संपर्क में आने से स्वयं के साथ-साथ सभी आत्माएं उनसे संतुष्ट रहती है। प्रत्येक व्यक्ति संतुष्ट का अनुभव करते हैं। इसके विपरीत जिनका व्यवहार कटुता पूर्ण एवं असभ्य होता है उनके संबंध भी कम होते हैं तो आज हमें अपने संबंधों को मधुर श्रेष्ठ कैसे बनाएं। हम जिनके भी संबंध संपर्क में आए उन्हें हमारे द्वारा जैसे शुभ भावना शुभकामना एवं दुआओं की ब्लेसिंग दे ।कोई अशांत है परेशान हैं उन्हें अपने प्राप्त हुए शांति और सद्गुणों का दान दें। क्योंकि परमपिता परमात्मा है दाता विधाता वरदाता है दाता बनके ज्ञान दे रहा है विधाता बनके हमारा श्रेष्ठ भाग्य कैसे बने उसकी शिक्षा दे रहा है और वरदाता बनके हम बच्चों की वरदान उसे रोज झोली भर रहा है। तो हम जितना ही इन गुणों का सद्गुणों का दान करते हैं अन्य आत्माओं को बांटते हैं इससे हमारे संबंधों में मधुरता और श्रेष्ठता आने लगती। प्रायः देखा जा रहा है कि मनुष्य देने की जगह देवता हो गया है जो देता है वही देवता है तो हमें अपने सहयोग से सभी आत्माओं को कुछ ना कुछ अवश्य देना। उन्होंने बताया कि इस 26 वर्ष से गीता बहन जी सुबह शाम ईश्वरी क्लास में आते हैं। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा इस मार्ग पर चलकर हमारे जीवन में कैसे सुख शांति संतुष्टि और अनेक चिंता और परेशानियों से हम मुक्त होते हैं और हमारा जीवन सदा खुशियों भरा कैसे बनता है यह हम 26 वर्षों से अनुभव कर रहे हैं और अनेकों को कराते हैं। बैंक से रिटायर बालकिशन भाई ने अपना अनुभव सुनाते हुए कहा एवं परमात्मा की याद से परमात्मा की दुआओं से सदा संतुष्ट और खुशी का अनुभव करते हैं सदा तनाव मुक्त जीवन का अनुभव करते हैं। सदा परमात्मा का धन्यवाद करते हैं। क्लास में उपस्थित सभी भाई बहन अनिता बहन सरिता बहन शुभम दीपाली प्रियांशी ट्विंकल यह सभी स्टूडेंट रोज मेडिटेशन का अभ्यास करते है कुसुम बहन ने अपना अनुभव सुनाइए परमात्मा को प्राप्त करने के बाद हम निश्चिंत रहते हैं सभी चिंताएं और मन के भुज परमात्मा को देखकर हम सदा हल्के रहते हैं सभी भाई बहनों ने दीप जलाकर यह संकल्प लिया कि हम सदा इस ईश्वरी मार्ग पर चलकर अनेक आत्माओं का जीवन दुख और चिंताओं से परेशानियों से मुक्त करेंगे और जो खुशियां संतुष्टि जो प्राप्तियां हमें यहां हुई है वह हम अन्य आत्माओं को अवश्य करेंगे।