भवानीमंडी। मशहूर पार्श्वगायक, पदम् श्री, शहंशाह ए तरन्नुम मोहम्मद रफी को उनकी 98 वीं जयंती के अवसर पर यादगार सांस्कृतिक मंच द्वारा कार्यक्रम यादें रफी आयोजित कर श्रद्धांजलि दी गई।
इस अवसर पर लोकेश मकवाना ने मैंने पूछा चांद से कि देखा है कहीं मेरे यार सा हंसी चांद ने कहा नहीं नहीं नहीं, महेश चोकसे ने लाखों है निगाह में जिंदगी की राह में सनम हसीन जवान, हंसराज आस्तोलिया ने रिमझिम के गीत सावन गाए, हाय भीगी भीगी रातों में होठों पर बात दिल की आय हाय भीगी भीगी रातों में, दीपक राठौड़ ने खुश रहे तू सदा यह दुआ है मेरी बेवफा ही सही दिलरुबा है मेरी, दक्ष आस्तोलिया ने चुरा लिया है तुमने जो दिल तो नजर नहीं चुराना सनम बदल के मेरी तुम जिंदगानी कहीं बदल ना जाना सनम, राजेंद्र आचार्य ने तू इस तरहां से मेरी जिंदगी में शामिल है जहां भी जाऊं ये लगता है कि तेरी महफिल है, राकेश शर्मा ने कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, विशाल श्रीवास्तव ने आया रे खिलौने वाला खेल खिलौने लेके आया रे, किशोर तंवर ने जानेमन जाने जिगर जान ले, राजेश जैन करावन ने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। कपिल सौराष्ट्र ने तू इस तरहां से मेरी जिंदगी में शामिल है जहां भी जाऊं यह लगता है तेरी महफिल है, ललित जांगिड़ ने फिरकी वाली तू कल फिर आना नहीं फिर जाना तू अपनी जुबान से तेरे नैना हैं जरा बेइमान से, डॉक्टर अनिल कुमार गुप्ता ने हम तो चले परदेस हम परदेसी हो गए छूटा अपना देश हम परदेसी हो गए गीत की प्रस्तुति दी।