मनासा। कुकड़ेश्वर सहस्त्र मुखेश्वर समिति मनासा द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर दुधलाई द्वारा आयोजित मातृ सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि अमर ज्योति श्रीवास्तव (वरिष्ठ अध्यापिका नीमच) एवं प्रेरणा ठाकरे (राष्ट्रीय कवियत्री नीमच), विशेष अतिथि तुलसी बाई धनगर सरपंच लसूडिया, कार्यक्रम की अध्यक्षता कलाबाई धनगर सरपंच दुधलाई द्वारा की गई।
सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा मां सरस्वती का पूजन किया तत्पश्चात विद्यालय के बहनों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। अतिथियों का स्वागत महिला मंडल की सदस्यों द्वारा किया गया। मातृ सम्मेलन में माताओं की कई प्रकार की प्रतियोगिता संपन्न की गई। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
मातृ सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि माता ही बच्चों की प्रथम गुरु होती है। आज के आधुनिक युग में माताओं को अधिक सचेत होने की आवश्यकता है। बच्चों को शिक्षा जरूर विद्यालय में मिल जाएगी, लेकिन संस्कार अपने घरों से शुरू होंगे। जिसकी जिम्मेदारी माताओं के कंधे पर रहती हैं। हमें बच्चों को बड़ों के प्रति आदर सम्मान एवं आध्यात्मिक की ओर शिक्षा की ओर बच्चों को प्रेरणा देने चाहिए।
साथ ही मुख्य अतिथि ठाकरे द्वारा माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर संस्कारों का केंद्र है, जहां पर बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की शिक्षा भी दी जाती है। साथ ही आज मातृ सम्मेलन में माताओं द्वारा मातृ शक्तियों द्वारा प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए हैं, जो कि अत्यधिक सराहनीय है। हमें बेटियों को शिक्षित और साहसी बनाने की आवश्यकता है, जिससे कि हमारे समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त किया जा सके। साथ ही हमें बच्चों को बड़ों के प्रति आदर एवं हमें गुरुओं के प्रति सम्मान करना चाहिए और ऐसे आयोजन से समाज में समरसता का भाव बढ़ता है। विद्यालय परिवार को इस सफल आयोजन की बधाई शुभकामनाएं देती हूं।
कार्यक्रम में प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली माताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम समाप्ति पर सभी आगंतुक मातृशक्ति को विद्यालय द्वारा चाय अल्पाहार कराया गया। इस मातृ सम्मेलन को सफल बनाने में आचार्य/दीदी परिवार का सराहनीय योगदान रहा।
कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था प्रधानाचार्य महेश खिंची द्वारा किया गया एवं अंत में आभार प्रकट दीपिका भटनागर द्वारा व्यक्त किया गया।