नीमच। श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ राजेंद्र सुरी जैन मंदिर श्री पार्श्वनाथ राजेंद्र सूरी राजमल पानबाई डूंगरवाल चैरिटेबल ट्रस्ट नीमच के तत्वावधान एवं गच्छाधिपति आचार्य श्री अभयदेव सुरीश्वरजी मसा की आज्ञा अनुवर्तीनी प्रवर्तनी परम पूज्य सुदर्शना श्रीजी, की शिष्या परम पूज्य साध्वी श्री चंद्रकला श्रीजी की शिष्या साध्वी शील माला श्रीजी एवं साध्वी रत्न माला श्रीजी महाराज साहब श्रीजी मसा की पावन निश्रा में श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वर जी मसा की 197 जन्म जयंती एवं 117 पुण्यतिथि पौष सुदी सातम के पावन उपलक्ष्य में गुरु सप्तमी पर्व तीन दिवसीय विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया।
साध्वी महाराज साहब ने कहा कि गुरु राजेंद्र सूरी का पुण्य प्रचंड प्रबल था। उन्होंने जीवन में बहुत ही धर्म की प्रगति के कार्य किए थे। बचपन में उन्होंने धर्म की विद्या ग्रहण की, जवानी में उन्होंने बहुत पूर्णियार्थ धन कमाया। बुढ़ापे में उन्होंने धर्म बहुत किया। धर्म बिना बुढ़ापा का जीवन अधूरा रहता है। जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी तय है। हमारा पुण्य प्रबल हो तो कम परिश्रम में भी अच्छा फल मिलता है। इसलिए सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए। संसार में माता-पिता ही सब कुछ होते हैं। उनकी आज्ञा के बिना कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। जिनके मन में धर्म होता है, उनसे शौक भी दूर रहता है। जिसके साथ नवकार मंत्र की भक्ति होती है वह अपनी मंजिल और लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। धर्म कर्म करने वाले की सभी समस्याओं का निराकरण सरलता से हो जाता है। संसार असार है इसलिए दीक्षा ग्रहण कर जीवन का कल्याण करना चाहिए। संसार का मोह हमें सब बातों में पीछे कर देता है। दीक्षार्थी को जन्म देने वाली माता रत्न कुक्षी कहलाती है। संसार का मोह त्यागे बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है। संयम जीवन के बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है।विनय और विवेक के बिना धर्म सत्संग नहीं मिलता है।
ट्रस्ट अध्यक्ष राजेंद्र डुंगरवाल ने कहा कि राजेंद्र सूरी जी महाराज साहब ने स्वर्णागिरी तीर्थ को शिया-सुन्नी से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया और मुक्त कराया। राजेंद्र सूरीजी ने अभिदान राजेंद्र कोष के रूप में हमें सौगात दी और जैन समाज मैं आए शीतल चार व यती परंपरा को समाप्त किया।
कार्यक्रम की श्रृंखला में जैन कॉलोनी स्थित शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में पूजन, आरती, प्रभु भक्ति का आयोजन किया गया। 108 दीपक से पूजा के लिए पाठ सजाया गया। आराधना भवन एवं परमात्मा को चांदी के मंदिर में गुलाब के फूलों से श्रृंगारित किया गया था। इस अवसर पर विभिन्न भजनों की प्रस्तुति दी गई।
सुबह 08 बजे नवकारसी विमल कुमार आंचलिया परिवार द्वारा करवाई गई। 09 बजे मंदिर से रथ यात्रा जैन कॉलोनी स्थित शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर से प्रारंभ हुई जो जैन भवन मार्ग रोड वीर पार्क रोड महेश सर्कल, कमल चौक, घंटाघर, तिलक पथ, पुस्तक बाजार, जैन भवन मार्ग, वीर पार्क रोड, जैन कॉलोनी स्थित शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर पहुंच कर धर्म सभा में परिवर्तित हो गया। रथ यात्रा में सबसे आगे जिन शासन की स्वर्ण ध्वजा लिए युवक चलायमान थे। भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा एवं गुरु राजेंद्र सूरी की तस्वीर को रथ में फूलों से सजाया गया। मातृशक्ति कलश सिरोधार्य किए चल रही थी। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु राजेंद्र सूरी के चित्र पर दीप प्रजवलित कर अतिथियों द्वारा किया गया। धार्मिक चढ़ावे की विभिन्न बोलिया आयोजित की गई जिसमें समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया। सामूहिक गुरु वंदन किया गया। साध्वीजी महाराज साहब द्वारा नवकार मंत्र एवं मांगलिक श्रवण कराई गई। गुरु राजेंद्र सूरी के जयकारे लगे।गुरु गुणानुवाद सभा के बाद स्वामी वत्सल का आयोजन मुख्य लाभार्थी राजमल सुशील राजेंद्र प्रशम तन्मय जयवर्धन डूंगरवाल परिवार, सह लाभार्थी 7 वर्षितप मंडल, द्वारा आयोजित किया गया। सांय 7 बजे प्रभु भक्ति अंगरचना गजेन्द्र संजय चण्डालिया द्वारा एवं कुमारपाल महाराजा द्वारा 108 दीपक से महाआरती चढ़ावे की धार्मिक बोली सेवन वर्षितप मंडल ने ली। सांय 6 बजे गिरिराज सोनी के आवास महावीर बाग से जुलूस निकला व आरती की, मंगल दीपक का चढ़ावा गुणवंतलाल बंडी परिवार ने की, राजेंद्र सूरी की आरती तेजपाल केसरीमल छाजेड़ सोनाली गारमेंट्स परिवार ने की।
दोपहर 12.39 बजे श्री राजेंद्र गुरुपद महानपूजन, कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसके धर्म लाभार्थी बंसीलाल प्रकाश चोरडिया परिवार थे। जय जिनेंद्र के लाभार्थी भारत राजेंद्र जारौली परिवार व कार्यक्रम में विधि कारक पंकज जैन झार्डा थे।
धर्म सभा में वरिष्ठ समाजसेवी प्रेम प्रकाश जैन, शिखर चंद्र पगारिया, वीरेंद्र लोढ़ा, बाबूलाल लोढ़ा, अरुण चौरडिया, गुणवंत बंडी, प्रकाश चौरडिया, सुरेश पोरवाल, सुशील चौधरी, विमल सकलेचा, राजेश मानव, जितेंद्र सकलेचा, विधायक दिलीपसिंह परिहार, जिला अध्यक्ष पवन पाटीदार बीजेपी आदि समाजजन उपस्थित थे।
धर्म सभा का संचालन पंकज धीग ने किया। स्वागत गीत सरिता कटारिया, ललिता मोगरा, स्नेहलता ओसवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। आभार अरुण चौरडिया द्वारा माना गया।