चित्तौड़गढ़। पौष पूर्णिमा पर्व का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है, इस दिन से माघ मास के पवित्र स्नान का शुभारम्भ होता है। 25 जनवरी को गुरूवार का दिन, कर्क राशि का चन्द्रमा, प्रातः 8 बजकर 38 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र उसके बाद पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग रहेगा। पौष पूर्णिमा पर कर्क राशि का चन्द्रमा और मकर राशि का सूर्य, अपनी प्राणदायिनी अमृतमयी किरणों का संचरण कर जल में प्राणदायी उर्जा समाहित करेंगे। गुरू पुष्य योग के कारण इस दिन स्नान, दान का कई गुना महत्व रहेगा तथा इस दिन राशि रत्न अथवा शुभ वस्तुओं का क्रय कर उपयोग करना बेहद लाभकारी रहेगा। मन, मस्तिष्क एवं जल तत्व को प्रभावित करने वाला चन्द्रमा स्वयं की कर्क राशि में पूर्णिमा के दिन विद्यमान होना अत्यंत प्रभावशाली है, जो स्नान-दान के पुण्य प्रताप को कई गुना बड़ा रहा है। साधु-संतों के लिए ये विशेष पर्व होता है। इस दिन कई संत तीर्थ और पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इनके साथ ही अन्य लोग भी नदियों में डूबकी लगाते हैं। ये पर्व मोक्ष की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए बहुत ही विशेष माना जाता है। कई पुराणों में कहा गया है कि पौष महीने की पूर्णिमा मोक्ष दिलाती है। इसलिए मान्यता है कि इस दिन तीर्थ स्नान करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं और मरने के बाद मोक्ष मिलता है।
पुण्य को पूर्ण करने वाला पर्व
श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी का कहना है कि धर्म ग्रंथों के अनुसार जो लोग पूरे पौष महीने में भगवान का ध्यान कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं, उसकी पूर्णता पौष पूर्णिमा के स्नान से हो जाती है। यानी इस पर्व पर तीर्थ स्नान और दान से पुण्य का पूरा फल मिलता है। इस पर्व पर किए गए पुण्य का फल कभी खत्म नहीं होता है। इस दिन काशी, प्रयाग और हरिद्वार में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन शाकंभरी जयंती मनाई जाती है। वहीं छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन छेरता पर्व मनाती हैं।
तीर्थ स्नान का महत्व
पौष माह की पूर्णिमा पर सूर्याेदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद तीर्थ या पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। ऐसा संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाना चाहिए। इसके बाद पूरे दिन व्रत और दान का संकल्प लेना चाहिए। फिर किसी तीर्थ पर जाकर नदी की पूजा करनी चाहिए। पौष माह की पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों और तीर्थ स्थानों पर पर स्नान करने का महत्व बताया गया है। नदी पूजा और स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होता है।
पौष पूर्णिमा पर माघ स्नान का संकल्प
शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा को माघ स्नान का संकल्प ले लेना चाहिए। तीर्थ स्नान के दौरान संकल्प करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही संभव हो तो एक समय भोजन का व्रत भी करना चाहिए। जिस प्रकार पौष मास में तीर्थ स्नान का बहुत महत्व है, उसी प्रकार माघ में भी स्नान और दान का भी विशेष महत्व होता है। माघ में दान में तिल, गुड़ और कंबल या ऊनी वस्त्र दान देने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।