नीमच। ग्राम रेवली देवली में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में परम पूज्य गुरुदेव स्वामी यज्ञमणि जी द्वारा पांचवें दिन की कथा में पूतना वध का बहुत ही सुंदर चित्रण समझाया। गुरुदेव ने बताया कि पुतना पुर्वजन्म राजा बलि की बेटी थी और पूर्व जन्म में रत्नमाला इसका नाम था। जब भगवान वामन अवतार लेकर के राजा बलि को छलने गए तब इसने मन में संकल्प किया था कि ऐसे बालक को जहर पिला देना चाहिए। इसी छोटी सी मन की त्रुटि के द्वारा यह बहुत बड़े भक्ति की पुत्री होने के बाद भी भटक गई थी और इसको मोक्ष नहीं मिला। तब पुनः इसका जन्म पुतना नाम से मथुरा में हुआ और भगवान को स्तनपान कराने के बहाने इसको मोक्ष मिला।
गुरुदेव ने आगे बताया कि परमपिता परमात्मा हर मनुष्य के लिए तत्पर एक पांव पर खड़े हैं। सिर्फ मनुष्य को परमात्मा का भजन और आराधना करने के लिए निरंतर भक्ति करना चाहिए इसी प्रसंग में बाल लीलाओं के माध्यम से माखन चोर क्रिया गोचरना जैसे कई प्रसंगों में गोवर्धन लीला तक सुमधुर भजनों के द्वारा और प्रसंग के द्वारा महाराज जी ने भक्तों को कथा श्रवण कराई।