चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ के आंवल हेड़ा में स्थित निलिया महादेव गौशाला में निर्मित लक्ष्मी वास गोमय ईंट को श्री निलिया महादेव गौशाला के तत्कालीन सचिव कमलेश पुरोहित, ऋतुराज पालीवाल, राजकुमार वैष्णव व अन्य सदस्यों के द्वारा यहां से अयोध्या जाकर बड़ी छावनी के महंत व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष श्री महंत नृत्य गोपाल दास जी के शिष्य को भेंट की।
अध्यक्ष द्वारा ईंट को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि गौ माता का हमारे वेदों में बहुत महत्व बताया गया है। श्री राम जन्मभूमि पर जो भव्य मंदिर बन रहा है उसकी नींव में गोमय ईंट को रखना अपने आप में सौभाग्य की बात है। उन्होंने श्री नीलिया महादेव गौशाला की इस नवाचार की भूरी भूरी प्रशंसा की थी। अभी भी कई लोग अपने घर अथवा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की नींव के मुहूर्त पर इस गोमय में ईंट को लगाकर अपना कार्य प्रारंभ करते हैं।
वर्ष 2020-21 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरकार्यवाह भैया जी जोशी द्वारा चित्तौड़गढ़ के अनुभवी इंजीनियर के एम जैन व इंजीनियर दीपक भट्ट के द्वारा एक ऊर्जा कलश बनवाया गया। जिसे श्री राम मंदिर के गर्भ गृह के नीचे स्थापित किया गया था। यह ऊर्जा कलश निरंतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता रहता है। इस तरह की ऊर्जा वास्तु पर कार्य करने वाले हिंदुस्तान में गिने चुने लोग ही हैं। चित्तौड़गढ़ का यह सौभाग्य रहा कि एक अनुभवी इंजीनियर और एक युवा इंजीनियर की टीम इस तरह का कार्य समझकर करने में सक्षम है। मंदिर में ऊर्जा कलश को स्थापित करने के बाद निरंतर उससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता रहता है, जिससे उस कलश के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सभी लोगों का मन मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पढ़कर असीम शांति का अनुभव होता है। चित्तौड़गढ़ अनादि काल से वीरता साहस शौर्य भक्ति स्वामी भक्ति के अलग-अलग मापदंडों पर अपना एक अलग मान बिंदु तय किए हुए हैं, उसी क्रम में पूरे देश में चित्तौड़गढ़ की पहचान आज के आधुनिक युग में सीमेंट के हब के रूप में भी प्रसिद्ध हुई है। वैसे तो रामलला के मंदिर में बहुत ही कम सीमेंट का उपयोग किया गया है, परंतु जहां कहीं भी कार्य सीमेंट से संबंधित रहा हो उसमें भी सीमेंट सप्लाई करने में हमारा चित्तौड़गढ़ जिला अव्वल रहा है। जब श्री राम मंदिर निर्माण की बात आई तब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र जी मिश्र ने पूरे देश के विभिन्न सीमेंट उद्योगों के से सीमेंट के सैंपल मंगवा कर उनकी गुणवत्ता और उनकी लाइफ के बारे में जांच करवाई। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि उन सभी सैंपल्स में से चित्तौड़गढ़ से निकलने वाले चुना पत्थर से बनने वाली सीमेंट गुणवत्ता के मामले में अव्वल साबित हुई।
चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में स्थित विभिन्न सीमेंट उद्योगों ने यहां से श्री अयोध्या धाम रैक भेज कर सीमेंट की आपूर्ति की।