नीमच। शहर के समीपस्थ गांव रेवली देवली में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा हैं। कथा सुनने प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्तजन पहुंच हैं। कथा का वाचन गुरुदेव स्वामी यज्ञमणि जी महाराज सकरानी रैयत जिला नीमच के मुखारविंद से किया जा रहा हैं।
कथा के दौरान गुरुदेव ने बताया कि सुदामा के जीवन में एक ही श्रेष्ठ मित्र थे और वे थे परब्रह्म भगवान कृष्ण। हर वक्त सुदामा अपने मित्र के सहारे से भीक्षाव्रति के द्वारा जीवन यापन करते थे और एक दिन परमात्मा का विश्वास और अटल तपस्या सार्थक हुई। द्वारिका नाथ ने जैसे महल द्वारका में थे वैसे महल सुदामा जी के वृंदापुरी में बना दिए। इसी प्रसंग में गुरुदेव ने पांडवों का प्रसंग बताते हुए कहा कि पांडवों ने भगवान को अपना मित्र माना कठिन से कठिन परिस्थितियों में भगवान का नाम जीवन से नहीं बिसराया तो परमात्मा ने उनको युद्ध में विजय दिलाई और हस्तिनापुर का सर्व राज्य पांडवों को प्रदान कराया। जब गुरुदेव से हमारी चर्चा हुई कि आपका उद्देश्य कथा के माध्यम से जनता में क्या संदेश देना है तो स्वामी जी ने कहा कि जीवन तो नष्ट होने वाला है अगर परमार्थ के लिए नहीं जिए तो मरने वाला शरीर संसार में अपना नाम भी साथ लेकर चला जाएगा। इसलिए हमारा उद्देश्य है कि जगह-जगह धर्म को स्थापित करना, भक्तों को प्रेरित करना और मंदिरों का जिर्णोद्धार एवं नवनिर्माण करवाना है। वर्तमान में गुरुदेव की प्रेरणा से 9 शिवालयों और 6 चारभुजा नाथ मंदिरों का निर्माण चल रहा है और कई मंदिरों का उद्यापन स्वामी जी के हाथ से हो चुका है।
आज का मुख्य प्रसंग रामलला की झांकी के द्वारा सुंदर विग्रह एवं राज्याभिषेक का चित्रण कथा के माध्यम से हुआ। हजारों भक्तों ने इस कथा में पधार कर ज्ञान गंगा में डुबकियां लगाई।
कथा का आयोजन रामनारायण पुरोहित मुंशीजी के परिवार द्वारा कराया गया। कथा उपरांत विशाल महाप्रसादी का आयोजन भी यजमान के द्वारा रखा गया।