चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ सेन समाज द्वारा जिला कार्यालय पर बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरान्त 100वीं जयंती पर भारत सरकार द्वारा भारत रत्न दिये जाने पर खुशी जाहीर की और आभार जताया। बैठक की अध्यक्षता जिला सेन समाज अध्यक्ष बालुराम सेन ने की। मुख्य अतिथि सुरेश वर्मा थे।
बैठक में बताया कि बिहार के छोटे से गांव पीतोझिया के एक गरीब परिवार में जन्मे स्व कर्पूरी ठाकुर बाल्यावस्था से ही संघर्षरत होकर सौम्य स्वभाव, साधारण जीवन, ईमानदार, सादगी आदि गुणों से परिपूर्ण थे। राष्ट्र प्रेम की भावना इनके कूट-कूट कर भरी हुई थी तथा राममनोहर लोहिया एवं जयप्रकाश नारायण के साथ रहते हुए राजनैतिक जीवन अपनाया। बिहार के दो बार मुख्यमंत्री बने ठाकुर का वर्तमान निजी आवास अभी भी उसी अवस्था में है, इससे स्पष्ट है कि उन्होंने कभी भी अपना निजी हित नहीं साधा। 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीते, 1967 में पहली बार उपमुख्यमंत्री बने। शिक्षामंत्री के पद पर रहते हुए इन्होंने पहली बार अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया। वर्ष 1971 में पहली बार तथा 1977 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। इनका निधन 17 फरवरी 1988 को हुआ। स्व कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिये जाने की सेन समाज कईं वर्षों से प्रयासरत रहा जिसके ही परिणाम स्वरूप 100वें जन्म दिवस पर उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा हुई। इससे सम्पूर्ण देश के सेन समाज में हर्ष की लहर व्याप्त हुई। चित्तौड़गढ़ में सेन समाज द्वारा ज्ञापन सौंप कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्र सरकार का आभार जताया। बैठक का संचालन गोपाल नीलमणी दुर्ग ने किया। अंत में आभार श्रीधर सेन ने जताया।
इस अवसर पर नाई महासभा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश पायलट, महासचिव गोपाल नीलमणी, प्रगतिशील संस्थान पूर्व अध्यक्ष नरेश परिहार, जिला सचिव श्रीधर सेन, राष्ट्रीय नाई महासभा प्रदेश महासचिव विष्णु सेन, पूर्व अध्यक्ष दिलीप सेन घटियावली, जिला उपाध्यक्ष भगवानलाल खटोड़, नारायणी सेना जिला महामंत्री लवकुश सेन, जिला सेन समाज जिला उपाध्यक्ष रमेशचन्द्र सेन, सेन नवयुवक मंडल अध्यक्ष पहलवान गोपाल लाल सेन, जिला मंत्री बसंतीलाल सेन, मुकेश सेन, नाई महासभा प्रदेश महासचिव दिनेश सेन राशमी, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवलाल सेन पीपलवास आदि उपस्थित रहे।