नीमच। श्रीमद् भागवत कथा वाचन के अंतिम दिन कथा वाचक शिवजी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के संपूर्ण जीवनवृत पर चर्चा की और इससे मिली सीख को अपने जीवन में उतारने की नसीहत दी।
उन्होने श्रीकृष्ण और उनके पुत्रों के बीच के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार श्रीकृष्ण अपने पुत्रों के साथ ही जा रहे थे। इसी बीच एक कुंए में एक गिरगिट देख श्रीकृष्ण के पुत्र रुक गए। बच्चों ने तोतली आवाज में कहा कि कुंए में कोई बड़ा जानवर गिरा पड़ा है। भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होते ही गिरगिट अपने स्वरूप में आ गया और कहा कि मैं राजा हूं और मैंने अपने जीवनकाल में सिर्फ दान किया। लेकिन एक छोटी सी गलती की वजह से आज मेरा स्वरूप बदल गया है। अपने अभिमान में मैंने एक ब्राह्मण का अपमान कर दिया। जिससे मेरी यह दुर्गति हुई। भगवान श्रीकृष्ण ने बच्चों को कहा कि सत्कर्म करना बेहद अच्छी बात है लेकिन अभिमान में चूर होना गलत।
शिवजी महाराज ने श्रोताओं से कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चंद्र की भांति भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीख लेकर हम खुद के जन्म को धन्य बना सकते हैं और मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा से किसी भी जीव की सेवा करने वाले कभी दुख नहीं भोगते। कथा वाचन कार्यक्रम के अंतिम दिन डुंगलावदा के माता जी समीप भूरालाल प्रजापति परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय भगवत कथा में श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ी।
प्रजापति परिवार ने किया सम्मान-
कथा वाचक शिवजी महाराज का सम्मान प्रजापति परिवार के भूरालाल प्रजापति ने शॉल ओढाकर किया। उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए परिजनो ने नगर क्षेत्र में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन होना अपने आप में सुखद अनुभूति देने वाला बताया। कथा के आयोजन के लिए प्रजापति परिवार सभी कार्यकर्ता सम्मान के पात्र हैं।