नीमच। हरि नाम का सुमिरन करने से जीवन का कल्याण होता है। हरि इच्छा को हमें स्वीकार करना चाहिए। यह मनुष्य का कर्तव्य भी है। दुख से बड़ी राम नाम की माला है। परमात्मा का स्मरण करेंगे तो दुख आता ही नहीं है। तन मन धन धर्म निति के साथ रहना चाहिए तभी जीवन सफल होता है। यह बात भागवताचार्य प्रमोद उपाध्याय ने कही। वे नीमच सिटी रोड स्थित बगीचा नंबर 10 नीमच में कुबरेश्वर महादेव महिला मंडल द्वारा आयोजित शिव पुराण कथा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि संसार में चाहे केसी भी संतान हो मां कभी भी संतान की बुराई नहीं करती है संतान को सदैव जीवन की उत्कृष्ट और सफलता की राह दिखाती है। नारी का लज्जा संसार में सबसे बड़ा गहना होता है। उसकी रक्षा करना पृथ्वी के प्रत्येक प्राणी का कर्तव्य होता है।
महाराज श्री ने गणपति जन्म के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता पार्वती ने अपने मेल से एक गण बनाकर उसमें प्राण प्रतिष्ठा की और माता पार्वती स्नान के लिए भीतर चली गई और बाहर सुरक्षा के लिए गण को विराजित कर दिया था। तब वहां शंकर भगवान पहुंचे और गण और शिव के बीच युद्ध हुआ और युद्ध में शंकर भगवान ने गण का सर धड़ से अलग कर दिया। तब माता पार्वती ने क्रोध किया और कहा कि मेरे गण को जीवित करना आपका कर्तव्य होगा नहीं तो में पृथ्वी पर विनाश कर दूंगी। तब शंकर ने अपने गण को भेजा और कहा कि जो माता अपने बच्चों को पीठ दिखा कर बेटी हो उसे बच्चे का कर लेकर आ जाना। तब एक हथिनी अपने बच्चे को पीट दिखा कर बैठी थी। गण उसी हाथी के बच्चे को ले आए और गण को हाथी का सिर लगा दिया था। तभी से गणेश जी प्रथम पूज्य का वरदान मिला था। शिव कथा जगत को पावन करने वाली ज्ञान गंगा है। अहंकार काम क्रोध मोह टूटने से जीवन में सफलता मिलती है। यदि हम सुख में शिव का स्मरण करे तो दुख कभी नहीं आता है। धर्म के मार्ग पर चलने वाले का सदैव कल्याण होता है। मनुष्य जीवन में यदि सफलता प्राप्त करनी है तो निंदा का अपराध करने से बचना चाहिए। हरी इच्छा को स्वीकार करना मनुष्य का कर्तव्य है। हरी इच्छा को हमें स्वीकार करना चाहिए यह मनुष्य का कर्तव्य भी है। दुख से बड़ी राम नाम की माला है। परमात्मा का स्मरण करेंगे तो दुख आता ही नहीं है। तन मन धन धर्म के साथ रहना चाहिए तभी जीवन सफल होता है। जिनको संसार ठुकरा देता है उसको शंकर भगवान अपनाते हैं और उसका कल्याण करते हैं करतें हैं।
कथा में हरियाली का प्रतीक हरे रंगों के परिधानों पहन बड़ी संख्या में क्षैत्रवासी उपस्थित थे। शिव पुराण कथा पौथी पुजन में पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष घनश्याम पांडेय अतिथि के रूप में उपस्थित थे। महिलाओं द्वारा हरे परिधानों में 108 आटे के दीपक बना कर आरती की गई। शिव पुराण पौथी आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
गणपति जन्म पर पुष्प वर्षा-
महाराज श्री ने शिव पुराण के मध्य जब गणपति जन्म का प्रसंग बताया तो भक्ति पंडाल देवा हो देवा गणपति देवा, गणपति के जयकारों से गूंज उठा भगवान बाल गणेश का अभिनय में नन्हे 8 माह के बालक विनायक पुत्र पुजा दिपक बोराना को सजाया गया। इस अवसर पर मेरे घर पधारो गणपति आज पधारो भजन पर श्रद्धालु झूम उठे।
शिव पुराण में कल गणपति विवाह-
शिव पुराण के मध्य मंगलवार को महाराज श्री गणपति रिद्धि सिद्धि विवाह के विषय पर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। बुधवार को 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन एवं हवन यज्ञ के साथ कथा का विश्राम होगा।