नीमच। अगले 10 से 15 दिनों में अफीम की फसल आने की तैयारी है। ऐसे में मालवा और मेवाड़ के किसान लामबंद होकर नीमच के जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां अफीम किसानों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन देकर मांग की गई कि खेतों में खड़ी अफीम फसल को चीरने का आदेश संबंधित विभाग द्वारा अति शीघ्र दिया जाए।
भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति के बैनर तले डिप्टी कलेक्टर मयूरी जोक को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि किसानों ने कभी भी सीपीएस पद्धति की मांग नहीं की है। हम पर सीपीएस पद्धति थोपी जा रही है। अफीम किसान लगातार 2008 से आंदोलन कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि 1991 से पहले काटे गए सभी अफीम पट्टे भी लूनी चिरनी के ही बहाल किया जाए।
ज्ञापन में किसानों ने याद दिलाया कि 24 नवंबर 2013 को चित्तौड़गढ़ में प्रधानमंत्री द्वारा परंपरागत अफीम खेती के अफीम पट्टे बहाली का आश्वासन दिया गया था। जिस पर अब अमल जरूरी हो गया है। सीपीएस पद्धति समाप्त कर लूनी चिरानी के अफीम पट्टे बहाल किया जाए। कलेक्टर कार्यालय पर किसानों ने जमकर नारेबाजी की। इससे पहले अफीम किसान नीमच के दशहरा मैदान में इकट्ठा हुए। यहां पर किसान नेताओं का उद्बोधन हुआ। इसके बाद किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
इस दौरान मांगीलाल मेघवाल, राधेश्याम गुर्जर, अमरलाल, रामचंद डांगी, कामरेड शैलेंद्र ठाकुर, सोनू पाटीदार, बापूलाल डांगी, उदयलाल धाकड़, मोहन सिंह शक्तावत, जगदीश राठौड़, प्रकाशचंद धाकड़, बद्रीलाल कुमावत और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।