चित्तौड़गढ़। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य विद्यासागर जी महा मुनिराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि विमलसागर जी, अनंतसागर जी, धर्मसागर जी एवं भावसागर जी के सानिध्य में 2 फरवरी को धर्म सभा का आयोजन हुआ। जिसके अंतर्गत चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, शास्त्र अर्पण किया गया। पद विहार में सहयोग देने वालो का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए-
मुनि विमल सागरजी महाराज ने कहा कि आपके लिए पुण्य का महोत्सव आने वाला है, अपने धन का उपयोग करना है। अवसर की पहचान सभी नही कर पाते है, अवसर पंख लगा कर उड़ जाता है। ऐसा ही अवसर आया जब मुनि प्रमाण सागर जी महाराज का लाभ मिला और बड़े मंदिर की नींव रखी गई और वह बनकर तैयार हो गया है, आसपास ऐसा मंदिर नही है। पीठ पीछे भी यश कीर्ति फैले ऐसा कार्य करे। इस महोत्सव को सफल बनाने के लिए सभी को मिल कर कार्य करना है। एकता से मिल जुलकर कार्य करना है, कलिकाल में एकता ही बल है।
मुनि भाव सागरजी महाराज ने कहा कि गरीब से अमीर बनने का मंत्र गुरुजी ने दिया है, दान देने से भगवान बनता है। व्यक्ति, आत्मा से परमात्मा बनते है पंचकल्याणक से, सभी को पात्र बनना है इंद्र इंद्राणी आदि सम्मान जरूरी है लेकिन सम्मान की भूख नहीं रखना चाहिए। जब भी पूजा, अभिषेक करो तो यह भावना करो कि है भगवन मैं आपके लिए रत्न स्वर्ण अर्पण करु भले ही आप सामान्य वस्तु चढ़ाए लेकिन भावना अच्छी रखे जो भी दान दिया जाता है, अर्पित किया जाता है, फिर उस धन संपत्ति का उपयोग नहीं करना चाहिये। पूर्वजों ने जो भी मंदिर बनवाए थे हम उनकी सुरक्षा कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण कार्य है, दान से सम्मान मिलता है। पूरी दुनिया में प्रसिद्धि फैलती है, घर से जो पूजन की शुद्ध सामग्री लाता है वह विशेष पुण्य का अर्जन करता है। भरत चक्रवर्ती जब पूजन करते थे तो द्रव्य के पहाड़ बन जाते थे, प्रभु की स्वर्ण और रतन से पूजन करना चाहिए।
प्रवक्ता मनोज सोनी ने बताया कि 7 फरवरी को दोपहर 2 बजे वंडर सीमेंट फैक्ट्री के कार्यक्रम में शामिल होने मुनि संघ का पद विहार होगा। वहीं रात्रि विश्राम होगा। 8 फरवरी को प्रातः 7 बजे अभिषेक शांतिधारा, भक्तामर विधान पाटनी परिवार आर के मार्बल वंडर सीमेंट की ओर से होगा। वहीं मुनि संघ की आहारचर्या होगी फिर शाम को मुनि संघ का विहार निम्बाहेड़ा के लिए होगा।