नीमच। ज्ञानोदय विश्वविद्यालय में बसंत पंचमी हर्षाेल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना द्वारा किया गया एवं सरस्वती वंदना प्रो. किरण नाहटा द्वारा गाई गई। विश्वविद्यालय की चांसलर डॉ. माधुरी चौरसिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि बसंत पंचमी देवी मां सरस्वती की उत्पत्ति का दिन माना जाता है। देवी सरस्वती विद्या, बुद्धि, कला, साहित्य, ऊर्जा और सृजन की देवी है। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा की जाती है जो ज्ञान संगीत और कला की देवी है। इस दिन लोग अपने घरों और स्कूलों में सरस्वती की पूजा करते हैं और उनसे ज्ञान और बुद्धिमत्ता की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। ज्ञानोदय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो.हेमंत प्रजापति ने कहां हम सभी संकल्प ले की भौतिक चीजों को छोड़कर ज्ञान प्राप्त करें और विद्वान बने।
संस्था के प्राचार्य डॉ.सुरेंद्र शक्तावत जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि बसंत ऋतु का आगमन प्रकृति की नवीनता और सुंदरता का प्रतीक है इस ऋतु में पेड़ पौधे नए पत्ते और फूलों से सज जाते हैं जो की प्रकृति की सुंदरता को दर्शाते हैं इसी श्रंखला में उप-प्राचार्य प्रो.विनीता डावर ने कहा कि मां सरस्वती का वरदान सबके पास होता है बस उसे समझने की जरूरत है अपनी आत्मा शक्ति को पहचाने और निरंतर जीवन में प्रगति करें ।प्रो.संदीप मुंदडा ने बताया कि किस तरह अमृत मंथन हुआ साथ डॉ.प्रीति तिवारी एवं प्रो.दीपिका लोहानी ने भी अपने विचार व्यक्त किये बीकॉम के विद्यार्थी नोमित सोलंकी को पुस्तक लेखन के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ज्ञानोदय विश्वविद्यालय के सभी प्राचार्य विभागध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।इस कार्यक्रम में सुंदर डेकोरेशन प्रो. सुजाता गर्ग एवं डॉ. श्वेता पुरोहित ने किया कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. किरण नाहटा द्वारा किया गया अंत में डॉ.विनीता डावर ने आभार व्यक्त किया।उक्त जानकारी प्रो.अनूप चौधरी ने दी।